गंगटोक (सिक्किम),17 जुलाई(आरएनएस)। भारत-चीन बॉर्डर के पास जवाहरलाल नेहरू रोड पर क्योंगनोसला गांव के नीचे सेवेंथ माइल पर पिछले 10 दिनों से भारी भूस्खलन के कारण 65 परिवार बेघर हो गए हैं. लैंडस्लाइड के कारण और सीमा संपर्क और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, भूस्खलन ने बॉर्डर की ओर जाने वाली पुरानी सड़क को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया है. यह रास्ता भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके किनारे कई भारतीय सेना का कैंप हैं. लोगों को डर है कि अगर दूसरा रास्ता भी प्रभावित होता है तो यह नुकसान सीमा सुरक्षा के नजरिए से एक बड़ी चुनौती बन सकता है.
भूस्खलन से बेघर हुए परिवार फिलहाल अस्थायी राहत शिविर में शरण लिए हुए हैं, जबकि लैंडस्लाइड अभी भी हो रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्थिति की गंभीरता और इलाके के रणनीतिक महत्व के बावजूद, किसी भी संबंधित अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी ने नुकसान का आकलन करने या उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रभावित इलाके का दौरा नहीं किया है.
लोगों के मुताबिक, क्षतिग्रस्त सड़क जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स के अधिकार क्षेत्र में आती है. लोगों का कहना है कि ग्रीफ अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सड़क अभी इस्तेमाल में नहीं है क्योंकि एक दूसरा रास्ता मौजूद है और उसे ठीक करने के लिए कोई फंड मौजूद नहीं है.
हालांकि, स्थानीय लोगों ने इस बात पर सवाल उठाया है और पूछा है कि अगर मौजूदा दूसरा रास्ता भी भूस्खलन की वजह से रोड ब्लॉक हो जाता है, जिससे बॉर्डर इलाके तक पहुंच बंद हो सकती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा.
प्रभावित लोगों ने भारत सरकार और सिक्किम सरकार से अपील की है कि वे तुरंत दखल दें, खराब हुए आधारभूत संरचना को ठीक करें, और स्थिति के बड़ी मुसीबत में बदलने से पहले बचाव के उपाय लागू करें.
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