नई दिल्ली 23 Jully (Rns) । सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी को बड़ा झटका देते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि सोनम रघुवंशी तीन सप्ताह के भीतर संबंधित पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करें। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं होती है, तो वह दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मेघालय सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी आधार पर जमानत देते समय त्रुटि की थी। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारण बिल्कुल नहीं बताए गए थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी न देना और जानकारी में तकनीकी या प्रक्रियागत कमी होना, दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। केवल तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोनम रघुवंशी को जून 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि विवाह के बाद मेघालय घूमने गए दंपति के दौरान कथित साजिश के तहत राजा रघुवंशी की हत्या की गई और शव को एक गहरी खाई में फेंक दिया गया। पुलिस का दावा है कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर अन्य लोगों की भी मदद ली गई थी।
इस मामले में पहले ट्रायल कोर्ट ने गिरफ्तारी संबंधी तकनीकी आधारों को देखते हुए सोनम को जमानत दी थी, जिसे मेघालय हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। इसके बाद मेघालय सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
शीर्ष अदालत के ताजा आदेश के बाद अब सोनम रघुवंशी को निर्धारित अवधि के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा, जबकि मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी।

