नई दिल्ली ,23 जुलाई ,(आरएनएस)। उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को उपराष्ट्रपति भवन में महान स्वतंत्रता सेनानी थिरु सुब्रमण्यम शिवा की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उन्होंने थिरु सुब्रमण्यम शिवा के राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान को याद करते हुए उन्हें भारत के महान देशभक्तों में से एक बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि थिरु सुब्रमण्यम शिवा तमिलनाडु के दक्षिणी क्षेत्र के छोटे से कस्बे वटलागुंडु के निवासी थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गाँव-गाँव जाकर लोगों को ‘वंदे मातरम्’ के जोशीले उद्घोष के साथ देश की आज़ादी के लिए समर्पित होने की प्रेरणा दी। उनके ओजस्वी भाषणों और राष्ट्रभक्ति की भावना ने अनेक लोगों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थिरु वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई के साथ थिरु सुब्रमण्यम शिवा को भी ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने उनकी राष्ट्रसेवा और स्वतंत्रता के प्रति अटूट निष्ठा के कारण कारावास में डाल दिया था।
उन्होंने कहा कि जेल में रहने के दौरान थिरु सुब्रमण्यम शिवा कुष्ठ रोग से पीडि़त हो गए, लेकिन उन्होंने इस गंभीर बीमारी को कभी भी अपने संकल्प के मार्ग में बाधा नहीं बनने दिया। जीवन के अंतिम क्षण तक वे भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य के लिए समर्पित भाव से कार्य करते रहे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि थिरु सुब्रमण्यम शिवा ने भारत माता को ही अपना ईश्वर माना और अपना संपूर्ण जीवन मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनका जीवन देशभक्ति, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है, जो आने वाली पीढिय़ों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि थिरु सुब्रमण्यम शिवा के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। उपराष्ट्रपति ने उनकी पुण्यतिथि पर देश की ओर से महान स्वतंत्रता सेनानी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्र उनके अमूल्य योगदान को सदैव कृतज्ञता के साथ स्मरण करेगा।
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