नई दिल्ली ,23 जुलाई ,(आरएनएस)। देश में एकसमान, स्पष्ट और प्रभावी कानून-निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के अंतर्गत संचालित विधायी प्रारूपण एवं अनुसंधान संस्थान (आईएलडीआर) द्वारा लेजिस्लेटिव ड्राफ्ट तैयार करने के 36वें बेसिक पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह पाठ्यक्रम 22 जुलाई से कर्तव्य भवन-02 स्थित विधि सभागार, नई दिल्ली में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के लिए प्रारंभ हुआ।
उद्घाटन समारोह में विधायी विभाग एवं विधि कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि, अतिरिक्त सचिव एवं पाठ्यक्रम निदेशक (आईएलडीआर) डॉ. मनोज कुमार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. राजीव मणि ने कहा कि देश में कानूनों में स्पष्टता, एकरूपता और कानूनी निश्चितता सुनिश्चित करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले विधायी प्रारूपण की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर हो रहे विधायी सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक समान और सटीक विधायी प्रारूपण अत्यंत आवश्यक है, जिससे कानूनों का क्रियान्वयन अधिक सरल और प्रभावी बन सके।
उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विधायी विभाग की उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके माध्यम से संरचित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की पहल के जरिए देश में विधायी प्रारूपण की गुणवत्ता को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है।
दो माह से अधिक अवधि तक चलने वाले इस पाठ्यक्रम में 13 राज्य सरकारों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 18 प्रशिक्षु अधिकारी भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण 22 जुलाई 2026 से 25 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को विधायी प्रारूपण के सिद्धांतों की गहन समझ प्रदान करने के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है, ताकि वे प्रभावी, सटीक और गुणवत्तापूर्ण विधायी प्रारूप तैयार करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल विकसित कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कानूनों के प्रारूपण की प्रक्रिया, विधायी भाषा, कानूनी स्पष्टता, प्रारूपण की तकनीक तथा व्यवहारिक अभ्यास से संबंधित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कानून बनाने की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, एकरूप और प्रभावी बन सकेगी।
विधि एवं न्याय मंत्रालय का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल विधायी प्रारूपण में सटीकता, एकरूपता और उत्कृष्टता को बढ़ावा देंगे, बल्कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्थागत क्षमता को भी सुदृढ़ करेंगे। इससे भविष्य में बेहतर गुणवत्ता वाले कानूनों के निर्माण और उनके प्रभावी क्रियान्वयन का मार्ग और अधिक मजबूत होगा।
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