नई दिल्ली ,23 जुलाई ,(आरएनएस)। देश में स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास, उद्योगों के साथ साझेदारी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देते हुए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर चार स्वदेशी प्रौद्योगिकियां उद्योगों को हस्तांतरित की गईं, स्मार्ट इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित ग्रामीण जल सेवा वितरण, मापन एवं निगरानी प्रणाली का व्यावसायिक शुभारंभ किया गया तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) से प्राप्त रॉयल्टी को भी सम्मानपूर्वक मान्यता दी गई।
इस कार्यक्रम का आयोजन सीएसआईआर–सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (सीएसआईआर-सीएसआईओ), चंडीगढ़ द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सीएसआईआर की महानिदेशक एवं वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव डॉ. एन. कलाईसेल्वी, सीएसआईआर-सीएसआईओ के निदेशक प्रो. शांतनु भट्टाचार्य, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि, प्रौद्योगिकी अपनाने वाले संस्थानों के प्रतिनिधि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
चार स्वदेशी प्रौद्योगिकियां उद्योगों को हस्तांतरित
कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीएसआईओ द्वारा विकसित कई महत्वपूर्ण स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उद्योगों को हस्तांतरण किया गया। इनमें इंडक्शन मोटर स्टेथोस्कोप (एम-स्कोप), पोर्टेबल एवं यूनिवर्सल मोटर-कम-पंप परफॉर्मेंस मॉनिटर (पीयू-एमपीपीएम) तथा आई-पावर क्वालिटी एनालाइजर (आईपीक्यूए) का लाइसेंस बेंगलुरु स्थित पंप एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को प्रदान किया गया।
इसके अलावा सुखोई-30 लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए विकसित हेड-अप डिस्प्ले (एचयूडी) के ऑप्टिकल मॉड्यूल एवं बीम कॉम्बिनेटर असेंबली की तकनीक भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), पंचकूला को सौंपी गई।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्मार्ट जल निगरानी प्रणाली का शुभारंभ
कार्यक्रम की एक प्रमुख उपलब्धि आईओटी आधारित ग्रामीण जल सेवा वितरण, मापन एवं निगरानी प्रणाली का व्यावसायिक शुभारंभ रहा। इस तकनीक को नई दिल्ली स्थित बायोमेट्री टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से बाजार में उतारा गया है।
यह आधुनिक प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता, उपलब्ध मात्रा और जलापूर्ति सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी करने में सक्षम होगी। इससे जल प्रबंधन अधिक पारदर्शी, प्रभावी और विश्वसनीय बनेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी से मिली 1.67 करोड़ रुपये की रॉयल्टी
सीएसआईआर-सीएसआईओ के निदेशक प्रो. शांतनु भट्टाचार्य ने बताया कि प्रयोगशाला लगातार अपनी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, पंचकूला से स्वदेशी सैन्य एवियोनिक्स प्रौद्योगिकी के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन के लिए 1.67 करोड़ रुपये की रॉयल्टी प्राप्त हुई।
इन तकनीकों में हेड-अप डिस्प्ले (एचयूडी), ड्रोग लाइट, टैक्सी लैंडिंग लाइट, एचयूडी स्तर परीक्षक तथा बोरसाइट एलाइनमेंट टूल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को मजबूत करने और भारतीय उद्योगों के साथ सीएसआईआर-सीएसआईओ की सफल साझेदारी का प्रमाण है।
अनुसंधान को उद्योग और समाज से जोडऩा ही लक्ष्य : डॉ. कलाईसेल्वी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलाईसेल्वी ने सीएसआईआर-सीएसआईओ की टीम को सफल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण के लिए बधाई दी। उन्होंने प्रो. शांतनु भट्टाचार्य के नेतृत्व में प्रौद्योगिकी विकास में तेजी, उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाने, बाहरी वित्तीय संसाधनों में वृद्धि तथा तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण की सराहना की।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का सफल व्यावसायीकरण सीएसआईआर के उस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत अनुसंधान को ऐसे उत्पादों और प्रक्रियाओं में परिवर्तित किया जा रहा है, जो उद्योगों के लिए मूल्य सृजित करने के साथ-साथ समाज को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाएं।
डॉ. कलाईसेल्वी ने वैज्ञानिकों से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप उद्योगोन्मुख और प्रभावशाली अनुसंधान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन सीएसआईआर-सीएसआईओ के व्यावसायिक विकास समूह (बीडीजी) के प्रमुख द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन देश में अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा स्वदेशी तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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