कॉलर पकड़कर चैंबर से बाहर घसीटा, 17 दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर
प्रयागराज 10 नवंबर (आरएनएस)। एअरपोर्ट थाना क्षेत्र स्थित एक अस्पताल में युवकों ने डॉक्टर को जमकर लात घूसे मारे। इसके बाद भाग गए। मामला 22 अक्टूबर को एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के पीपल गांव का है। पुलिस कमिश्नर से शिकायत के 17 दिन बाद मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. सुनील कुमार मूल रूप से कौशाम्बी के म्योहरिया गांव के रहने वाले हैं। वो पीपल गांव में टिया वानी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने बताया-22 अक्टूबर 2025 की दोपहर लगभग 2 बजे आरबी दिवाकर निवासी ईडब्ल्यूएस प्रीतमनगर थाना धूमनगंज, अपने पुत्र और दो अन्य साथियों के साथ अस्पताल में जबरन घुस आए। मैंने उन्हें बैठने के लिए कहा, लेकिन तीनों एक राय होकर उन पर हमला करने लगे। दिवाकर ने गला पकड़ लिया और उसका बेटा सीने के पास मुक्के मारने लगा। इस दौरान अन्य लोग भी लात-घूंसे चलाते रहे।
पीडि़त ने बताया कि आरोपियों ने उनके चेंबर में रखे कंप्यूटर, वेट मशीन और बीपी उपकरण को पटककर तोड़ दिया। शोर सुनकर जब अस्पताल का स्टाफ मौके पर पहुंचा तो उन्होंने स्टाफ के साथ भी मारपीट की।
आरोप है कि आरोपियों ने डॉक्टर का कॉलर पकड़कर उन्हें चेंबर से बाहर घसीटा और धमकी दी कि यदि दोबारा शिकायत की तो जान से मार देंगे। हमले में डॉक्टर सुनील कुमार के गाल, हाथ, सीने और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। डॉ. सुनील ने बताया कि घटना वाले दिन ही उन्होंने एयरपोर्ट थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने एसीपी को भी घटना की जानकारी दी और न्याय की गुहार लगाई, लेकिन तब भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
काफी प्रयासों के बाद जब डॉ. सुनील ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज से शिकायत की, तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई। पीडि़त का कहना है कि मुख्य आरोपी आर.बी. दिवाकर नोएडा के रजिस्ट्रार ऑफिस में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि घटना की पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद है, जिसमें आरोपी साफ दिखाई दे रहे हैं।
डॉ. सुनील कुमार का आरोप है कि थाना एयरपोर्ट पुलिस अभियुक्त पक्ष से मिली हुई है, इसी कारण न तो आरोपियों की गिरफ्तारी की गई और न ही मामले में उचित धाराएं लगाई गईं। उनका कहना है कि इस घटना में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत भी कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन पुलिस ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया।
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