अजय दीक्षित
बिहार विधानसभा चुनावों में इस बार पहले चरण में 62 फीसदी मतदान को लेकर राजनीतिक दलों में खलबली मची है इतना ही नहीं देशी, विदेशी मीडिया अपना अपना आंकलन कर रहीं हैं। तमाम यू ट्यूब चैनल समीक्षा करने लगे हैं कि बढ़ा हुआ मतदान किसके पक्ष में जाएगा। इंडिया ब्लॉक और राजग नेता अपने अपने पक्ष में तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि छह नवम्बर को हुए मतदान में महिलाओं ने और पुरुष ने बराबर यानी एक करोड़ 22 लाख वोट डाले हैं। अंतर इतना है कि महिलाओं की संख्या 48 फीसदी है और पुरुष 52 फीसदी है।इस हिसाब से देखे तो मतप्रतिशत
महिलाओं का 68 फीसदी आ रहा है।चुनाव सांख्यिकी विशेषज्ञ मानते हैं कि पहले चरण में महिलाओं का वोट अधिक पड़ा है।जबकि पूरे बिहार में 62 लाख मतदाता सूचियों में से हटाए गए हैं।एक्सिम इंडिया के यशवंत देशमुख ने कहा है कि इस बात के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि बढ़ा हुआ मतदान सत्ता हस्तांतरण करता है।मप्र , राजस्थान में 2023 में मतदान बड़ा था लेकिन मप्र में सरकार परिवर्तित नहीं हुई जबकि राजस्थान में कांग्रेस सरकार बदल गई।2019 के लोकसभा चुनावों में मतदान 2014 से अधिक हुआ परंतु मोदी सरकार पुन: आ गई।
लेकिन अधिकतर अधिक प्रतिशत मतदान सत्ता हस्तांतरण करता है।
बिहार विधानसभा चुनावों के मामले में बीबीसी संवाददाता मोहन शर्मा कहते हैं कि नीतीश कुमार द्वारा एक करोड़ महिलाओं को चुनाव से पहले दस हजार रुपए दिए इसलिए मतदान बड़ा है। लेकिन प्रतिष्ठित पत्रकार हिमांशु शर्मा और राजदीप सरदेसाई का कहना है कि बड़ा हुआ मतदान सत्ता हस्तांतरण कर सकता है।
जेडीयू नेता संजय झा ने कहा है कि पूरे प्रदेश में जेडीयू बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में जमकर मतदान हुआ है। और विशेषकर महिलाओं ने जाति से बाहर जा कर भी मतदान किया है। लेकिन खुफिया एजेंसी के सर्वे में पहले चरण में दोनों पक्षों के बीच कांटे का मुकाबला बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव दोनों उत्साहित हैं। यद्यपि कांग्रेस के नेता कुछ निराश हैं।
एनडीटीवी के पत्रकार राहुल देव का कहना है कि बड़ा हुआ मतदान का मुख्य कारण महिलाओं का आगे बढ़ कर मतदान करना ही है। वरिष्ठ पत्रकार नीरज चौधरी भी हड़प्रभ है कि महिलाओं का मत 68 फीसदी गिरा है। बिहार के इतिहास में सर्वाधिक मतदान 1977 में रिकॉर्ड किया गया था और 2020 यह 55.19 फीसदी,2015 में 54.93 फीसदी 2010 में 51.63 फीसदी थ लेकिन इस बार 62 फीसदी मतदान हुआ है। बिहार विधानसभा चुनावों में कुल 6.5 करोड़ बोटर है । मतदाता सूची के गहन अध्ययन में 62,49,500 मतदाता सूचियों में से विलोपित किए गए हैं।
अब चुनावों में एग्जिट पोल का कोई विशेष महत्व नहीं रहा है क्योंकि एग्जिट पोल भी राजनीतिक दल कराते हैं। और उनके परिणाम अधिक समय बेकार ही साबित हुए हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव इस बार इस प्रकार रखे गए हैं कि परिणाम की दोनों चरणों में एक रुपता बनी रहे ।चुनाव आयोग ने इस में जातियों, क्षेत्रों, धर्मों,का भी अध्ययन कर चुनाव किया है। क्योंकि चुनाव आयोग पर तमाम आरोप लगाए गए हैं। राहुल गांधी तो जैसे आयोग को भारतीय जनता पार्टी का दल ही मान रहे हैं।
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