रायपुर, 12 नवम्बर (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) ने अगले शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्य पुस्तकों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी शुरू कर दी है। निगम जल्द ही कागज खरीदी और प्रिंटिंग के लिए टेंडर जारी करेगा। निगम अध्यक्ष राजा पांडेय ने साफ चेतावनी दी है कि प्रिंटिंग या सप्लाई में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी फर्मों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
इस वर्ष समय पर कागज की आपूर्ति नहीं करने वाली दो फर्मों — ओरिएंट और श्रेयांस — पर क्रमश: 80 लाख और 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यदि उनका जवाब असंतोषजनक पाया गया तो उन्हें पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
राजा पांडेय ने बताया कि आगामी सत्र में निगम अन्य राज्यों — गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, पुडुचेरी और असम — की तर्ज पर स्वयं कागज खरीदेगा और प्रिंटिंग का कार्य ठेकेदारों से करवाएगा। इस बार कागज की गुणवत्ता के मानकों में सुधार किया गया है और देरी से आपूर्ति करने पर प्रति दिन 1त्न अतिरिक्त पेनाल्टी लगाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि पाठ्य पुस्तकों की छपाई की प्रक्रिया इसी माह से शुरू की जा रही है। एससीईआरटी को निर्देश दिए गए हैं कि वे 15 दिसंबर तक कक्षा-वार विषयों की सीडी निगम को सौंप दें। इस बार स्कूल खुलने से 10 दिन पहले किताबें स्कूलों और संकुलों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए सभी डिपो में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं तथा अगले वर्ष 8 नए डिपो बनाने की योजना भी तैयार की गई है। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष जैम पोर्टल के माध्यम से कागज की खरीदी से 20 रुपए प्रति किलोग्राम की बचत हुई है। पहले जहां कागज 98 रुपए प्रति मीटन की दर से खरीदा जाता था, वहीं इस बार 78 रुपए में खरीदा गया। लगभग 12,000 मीटन कागज की खरीदी से सरकार को करीब 24 करोड़ रुपए की बचत हुई है।
यू-डाइस कोड आधारित आपूर्ति
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा उपलब्ध कराई गई यू-डाइस कोड आधारित विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार इस वर्ष 2.41 करोड़ पाठ्य पुस्तकें छापी गईं। बाद में अतिरिक्त 23 लाख किताबें जोड़कर कुल 2.64 करोड़ पुस्तकों का वितरण किया गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 20 लाख किताबें कम हैं, जिससे करीब 10 करोड़ रुपए की बचत हुई। निगम का उद्देश्य है कि आने वाले सत्र में किताबें समय पर, उच्च गुणवत्ता के साथ और पूर्ण पारदर्शिता में स्कूलों तक पहुंचें, ताकि विद्यार्थियों को निर्बाध रूप से अध्ययन सामग्री मिल सके।
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