0 महराजपुर की ईमलीवती और फुल सिंह की प्रेरक यात्रा
= सुरेश मिनोचा =
एमसीबी, 12 नवंबर (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ राज्य के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम महराजपुर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत संचालित सुअर पालन केंद्र ने एक साधारण ग्रामीण परिवार के जीवन में असाधारण परिवर्तन ला दिया है। योजना के अंतर्गत निर्मित यह केंद्र आज ग्रामवासियों के लिए आत्मनिर्भरता, स्थायी आजीविका और ग्रामीण समृद्धि का सशक्त उदाहरण बन गया है।
मनरेगा से मिली नई दिशा
ग्राम की हितग्राही ईमलीवती और फुल सिंह पहले मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी और पारंपरिक सुअर पालन से अपना जीवनयापन कर रहे थे। लेकिन उचित ढांचे और संसाधनों के अभाव में उनका कार्य सीमित था। खुले में रखे जानवरों को बीमारियों और असुरक्षित वातावरण का सामना करना पड़ता था, जिससे उन्हें बार-बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। ग्राम पंचायत ऐजंसी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मनरेगा योजना के तहत सुअर पालन केंद्र निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया।
लगभग 1.20 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र आज न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
तकनीकी मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण निर्माण
निर्माण कार्य को तकनीकी दृष्टिकोण से योजनाबद्ध ढंग से पूरा किया गया। ग्राम पंचायत एजेंसी के पदाधिकारियों और तकनीकी सहायकों ने कार्य के प्रत्येक चरण में सक्रिय सहयोग दिया। मिट्टी की गुणवत्ता, जल निकासी, वेंटिलेशन और पशु स्वास्थ्य की दृष्टि से सभी मानकों का ध्यान रखा गया। परिणामस्वरूप केंद्र का निर्माण समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ संपन्न हुआ, जो आज पशुपालन की दृष्टि से एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित है।
स्वच्छ वातावरण से बढ़ी उत्पादकता
केंद्र बनने के बाद सुअरों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिला, जिससे बीमारियों की घटनाओं में कमी आई है। पहले जहाँ चारे की बर्बादी अधिक होती थी, वहीं अब केंद्र में बने कोठों के कारण चारा सुरक्षित रहता है और देखभाल भी आसान हो गई है। रोग नियंत्रण और पोषण में सुधार से सुअर पालन की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम
केंद्र के निर्माण के बाद ईमलीवती और फुल सिंह ने अपने जीवन में नई स्थिरता महसूस की है। अब वे हर छह महीने में 5 से 6 सुअर तैयार कर लगभग 3000 से 4000 रुपये प्रति सुअर की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। उनकी कुल वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। पहले जहाँ जीविका अस्थिर थी, वहीं अब वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन चुके हैं।
गांव में परिवर्तन की मिसाल
महराजपुर का यह सुअर पालन केंद्र आज आसपास के ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। कई किसान अब इसी तरह के केंद्र निर्माण के लिए आवेदन कर रहे हैं। यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि ग्राम स्तर पर तकनीकी दक्षता, सामुदायिक सहभागिता और सतत विकास के महत्व को भी रेखांकित करती है।
आत्मनिर्भरता की नई कहानी
ईमलीवती और फुल सिंह की यह कहानी इस बात का सजीव प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं को ग्राम पंचायतों और समुदायों के सहयोग से सही दिशा में लागू किया जाए, तो ग्रामीण आजीविका को मजबूत किया जा सकता है। मनरेगा के माध्यम से यह पहल ग्रामीण जीवन में रोजगार, सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान की भावना को साकार कर रही है।
यह सुअर पालन केंद्र आज महराजपुर गांव की आजीविका की नई पहचान बन चुका है कृ जहाँ परिश्रम, योजना और तकनीकी दृष्टि ने एक परिवार की जिंदगी ही नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की सोच को बदल दिया है।
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