वाराणसी 12 नवंबर (आरएनएस)। पद्म विभूषण गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल में बुधवार को वाराणसी और मिर्जापुर मंडलों की संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादन गोष्ठी-2025 का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। गोष्ठी का उद्देश्य किसानों के हित में कृषि निवेशों की व्यवस्था सुनिश्चित करना और तकनीकी खेती को बढ़ावा देना रहा।कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में डीएपी के दामों में वृद्धि नहीं होने दी गई है और किसानों को बीज व खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने मंडलायुक्त वाराणसी और मिर्जापुर को निर्देशित किया कि सरकारी केंद्रों पर अनुदानित बीज वितरण की गति तेज की जाए, ताकि समय पर किसानों तक बीज पहुंच सके।मंत्री शाही ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि 25 नवंबर तक गेहूं की बुवाई हर हाल में पूर्ण हो, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि हो सके। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे फसल चक्र का पालन करें और खरीफ व जायद की बुवाई भी समय पर करें। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जागरूकता के कारण वहां का कृषि चक्र सशक्त है और इसलिए वहां की उत्पादकता पूर्वी उत्तर प्रदेश से अधिक है। हमें भी यही मॉडल अपनाना होगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सरसों की उपज अब 36 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है, जो पहले मात्र 14 लाख मीट्रिक टन थी। यह सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य है कि हर व्यक्ति आत्मनिर्भर बने। आज देश के पास खाद्यान्न का पर्याप्त भंडारण है, लेकिन दाल और तेल के लिए अभी भी आयात पर निर्भरता बनी हुई है। इस पर नियंत्रण के लिए किसानों को दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देना चाहिए।कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक भंडारण उपलब्ध है। वर्तमान में सरकार के पास 12.5 लाख मीट्रिक टन यूरिया है। उन्होंने सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों को उर्वरक की उपलब्धता की निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही उर्वरक का प्रयोग करें, क्योंकि अत्यधिक उपयोग से भूमि की उत्पादकता घटती है। प्राकृतिक खेती की दिशा में भी हमें गंभीरता से कार्य करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के साथ किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मंडलायुक्त को धान खरीद केंद्र जल्द खोले जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि हर किसान उन्नति के नए आयाम छुए। चना और मसूर की खरीद भी क्रय केंद्रों पर की जाएगी।कृषि मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश श्रीअन्न पुनरोद्धार योजना के तहत मोटे अनाजों के प्रोत्साहन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि दुनिया की थाली में भारत का अन्न दिखाई दे। कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि गोष्ठी का ध्येय कृषि उत्पादकता में वृद्धि के उपायों की समीक्षा करना है। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं का अधिकतम लाभ लिया जाए। जल्द ही विभाग बैंकों के साथ बैठक आयोजित करेगा ताकि कृषि निवेश से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जा सके।प्रमुख सचिव सहकारिता सौरभ बाबू ने बताया कि सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 8100 हो गई है, जिनके माध्यम से बीज व उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इफको की खाद खरीदने पर किसानों को दुर्घटना बीमा की सुविधा भी दी जाती है।उद्यान विभाग के अपर सचिव बीएल मीणा ने फूड प्रोसेसिंग यूनिट, मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट, सोलर फेंसिंग जैसी योजनाओं और दी जाने वाली सब्सिडियों की जानकारी दी। वहीं, कृषि सचिव इंद्र विक्रम सिंह ने किसानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के समाधान प्रस्तुत किए।गोष्ठी में निदेशक उद्यान ने पर ड्रॉप मोर क्रॉप, स्प्रिंकलर और सब्जी की खेती जैसी योजनाओं पर दी जाने वाली सब्सिडी की जानकारी दी। कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी ने कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और बीज-उर्वरक केंद्रों पर पारदर्शिता लाने पर बल दिया।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत वाराणसी जनपद के 4300 किसानों को लगभग 99 लाख रुपये का बीमा लाभ दिया गया। गोष्ठी में विभिन्न योजनाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों और संगठनों को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

