लखनऊ 12 नवंबर (आरएनएस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2025 को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से स्वीकृति प्रदान कर दी है।इस संबंध में जानकारी देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि प्रदेश सरकार ने उच्च, माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभागों में सहायक आचार्य, टीईटी, टीजीटी और पीजीटी जैसी परीक्षाओं को पारदर्शी और शुचितापूर्ण तरीके से आयोजित कराने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 के अंतर्गत आयोग का गठन किया था। यह आयोग राज्य में शिक्षा सेवाओं से संबंधित सभी भर्ती परीक्षाओं को एकीकृत, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सुदृढ़ प्रक्रिया के माध्यम से संपन्न कराने के लिए जिम्मेदार है।मंत्री उपाध्याय ने बताया कि आयोग के कार्य-संरचना और बढ़ते दायरे को ध्यान में रखते हुए अब अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के पात्रता मानदंड को संशोधित किया गया है। अधिनियम की धारा 4(2)(क) में पूर्व प्रावधान — ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्य हो या रहा हो और राज्य सरकार में प्रमुख सचिव का पद या उसके समकक्ष पद धारण किया होÓ — को संशोधित करते हुए अब यह प्रावधान किया गया है कि ‘राज्य सरकार में प्रमुख सचिव का पद या उसके समकक्ष पद पर हो या रहा होÓ।उन्होंने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयोग का नेतृत्व ऐसे अनुभवी, सक्षम और प्रशासनिक दृष्टि से दक्ष व्यक्तित्व को मिले, जो आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी आधारित परीक्षा प्रणाली को अपनाकर पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया को गति प्रदान कर सके।मंत्री उपाध्याय ने यह भी कहा कि यह संशोधन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ युवाओं में चयन प्रक्रिया के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगा। योगी सरकार की मंशा है कि प्रदेश का हर अभ्यर्थी निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था में समान अवसर प्राप्त करे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सेवा व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश को ‘शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्रÓ बनाया जा सके।
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