जलस्तर अधिक होने से आ रही परेशानी
प्रयागराज 18 नवंबर (आरएनएस )। वर्ष 2026 में लगने वाले माघ मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। विश्व के इस सबसे बड़े आध्यात्मिक और धार्मिक मेले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 से होगी। संगम की रेती पर टेंट सिटी बसाने और पूरे मेले क्षेत्र में जमीन के समतलीकरण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, ताकि साधु-संतों और कल्पवासियों के लिए अखाड़े, कैंप व संस्थाएं सुगमता से स्थापित हो सकें।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने पूरे मेले क्षेत्र में लेवलिंग का कार्य शुरू कर दिया है। सिंचाई, बिजली, लोक निर्माण, स्वास्थ्य और अग्निशमन सहित विभिन्न विभागों को अपने-अपने हिस्से का कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग अस्थायी पोल लगाने और तार खींचने में जुटा है, जिससे मेले भर में पर्याप्त प्रकाश और विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर अभी कम नहीं हुआ है, इसलिए घाटों का निर्माण बाद में शुरू किया जाएगा। हालांकि, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पांटून पुलों का निर्माण प्रारंभ कर दिया गया है। दारागंज क्षेत्र से एक अतिरिक्त पांटून ब्रिज बनाने का प्रस्ताव भी है, जिससे मेले के दोनों तरफ आवागमन आसान हो सके।
मेला अधिकारी और पीडीए उपाध्यक्ष ऋषि राज ने बताया कि मेला आयोजन से जुड़े सभी विभागों की समन्वय बैठकें पूरी हो चुकी हैं। लगभग 70 करोड़ रुपये के कार्यों के टेंडर जारी होने के बाद विभागों को समयबद्ध रूप से निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कमिश्नर सौम्या अग्रवाल और डीएम मनीष वर्मा लगातार कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
माघ मेला 2026 को 7 सेक्टरों में बसाया जाएगा। इसमें संगम नोज, परेड ग्राउंड, रामघाट से गंगा तिराहा, नवास की मंदिर क्षेत्र के साथ-साथ गंगा पार छतनाग और झूंसी तक का क्षेत्र शामिल होगा। लगभग 800 हेक्टेयर में फैलने वाले इस विशाल मेले में 4000 से अधिक संस्थाएं स्थापित की जाएंगी। दिसंबर में भूमि आवंटन प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
नदियों का जलस्तर चुनौती बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद मेला प्रशासन का दावा है कि दिसंबर के अंत तक सभी तैयारियाँ पूरी कर ली जाएंगी, ताकि श्रद्धालु बिना किसी कठिनाई के माघ मेला 2026 का पुण्य लाभ उठा सकें।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

