लखनऊ, 18 नवंबर (आरएनएस ) बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान की पांचवीं वर्षगांठ पर सोमवार को एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नशा मुक्त भारत अभियान समिति, राष्ट्रीय सेवा योजना और मद्य निषेध विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव प्रमोद कुमार उपाध्याय उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य मद्य निषेध अधिकारी आर.एल. राजवंशी, डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, नोडल अधिकारी एवं नशा मुक्त अभियान समिति की चेयरपर्सन प्रो. शिल्पी वर्मा और कार्यक्रम संयोजक डॉ. तरुणा भी विशिष्ट रूप से शामिल रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब आम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके हुई। विश्वविद्यालय के कुलगीत के सामूहिक गायन ने माहौल को गरिमामय बनाया। इसके उपरांत आयोजन समिति द्वारा अतिथियों और शिक्षकों को सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण में प्रो. शिल्पी वर्मा ने नशा मुक्त भारत अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्वविद्यालय इस विषय पर लगातार सार्थक प्रयास कर रहा है और युवाओं को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करना ही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि यदि व्यक्ति का स्वास्थ्य संतुलित, मजबूत और ऊर्जावान नहीं होगा तो वह न तो अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राप्त कर पाएगा और न ही राष्ट्र निर्माण में योगदान दे पाएगा। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर की ऊर्जा, शरीर की स्वाभाविक शक्ति, मन की स्थिरता और विवेक को पहचानना शुरू करता है, तभी वह जीवन में बुरी आदतों से दूर होने की दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने प्रज्ञा, शील और करुणा—इन तीन गुणों को नशा मुक्ति का आधार बताते हुए कहा कि स्थिर, अनुशासित और संवेदनशील व्यक्तित्व ही सही निर्णय ले सकता है और समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नशा मुक्ति बाहरी दबाव का विषय नहीं बल्कि आंतरिक शक्ति का परिणाम है और जब युवा पीढ़ी इस जागरूकता को अपनाती है तो राष्ट्र की समृद्धि और उन्नति सुनिश्चित होती है।मुख्य अतिथि प्रमोद कुमार उपाध्याय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि असली परिवर्तन तभी आता है जब व्यक्ति स्वयं में अनुशासन और आत्मनियंत्रण पैदा करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को सम्मान और स्वस्थ जीवन का अधिकार देता है, और यदि युवा नशे की ओर बढ़ते हैं तो वे अपने ही उज्ज्वल भविष्य को कमज़ोर कर रहे होते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है; समाधान विवेक, लक्ष्य और आत्मसम्मान को प्राथमिकता देने में है। उन्होंने इस भ्रम से बाहर आने का आह्वान किया कि नशीले पदार्थ तनाव या चुनौतियों का हल देते हैं, क्योंकि वास्तविक शक्ति संयम और आत्मनियंत्रण में निहित है।राज्य मद्य निषेध अधिकारी आर.एल. राजवंशी ने चर्चा के दौरान बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख लोग नशीले पदार्थों के कारण अपनी जान गंवाते हैं, जो न केवल परिवारों बल्कि पूरे देश के लिए एक गम्भीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शिक्षा समाज निर्माण की आधारशिला है, उसी प्रकार नशा मुक्त भारत के निर्माण में प्रत्येक नागरिक का योगदान अनिवार्य है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे केवल स्वयं नशे से दूर न रहें बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें और इस अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज के सभी वर्ग एक साथ आगे आए तो आने वाली पीढिय़ों को एक सुरक्षित, सक्षम और नशा-मुक्त राष्ट्र प्रदान किया जा सकता है।कार्यक्रम के समापन चरण में सभी उपस्थित लोगों ने नशीले पदार्थों के उपयोग के विरुद्ध शपथ ली। मद्य निषेध विभाग द्वारा जागरूकता के उद्देश्य से एक आकर्षक मैजिक शो का आयोजन किया गया, जिसने युवाओं को नशा मुक्ति का सरल और प्रभावी संदेश दिया। विश्वविद्यालय की नशा मुक्त अभियान समिति द्वारा आकर्षक पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने कार्यक्रम की सार्थकता को और बढ़ाया। अंत में कुलपति और अतिथियों ने निबंध, स्लोगन और रंगोली प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहित किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश कुमार चतुर्वेदी ने किया।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी, मद्य निषेध विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बीबीएयू के छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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