रायपुर 18 नवंबर 2025(आरएनएस)पर्यावरणीय स्थिरता और औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन को प्रोत्साहन देते हुए भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र ने एंटिटी 1 वैल्यू इमिशन्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू किया है। इसका उद्देश्य फ्लू गैसों और ग्रीनहाउस गैसों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने हेतु उन्नत पायलट परियोजना स्थापित करना है। यह पहल उत्सर्जन में कमी लाने के साथ औद्योगिक अपशिष्ट को आर्थिक रूप से उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित कर भारत के सस्टेनेबिलिटी और ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को मजबूती देगी।
परियोजना को इस्पात अनुसंधान एवं विकास केंद्र (RDCIS) रांची और ऊर्जा प्रबंधन विभाग (EMD) कोलकाता संयुक्त रूप से संचालित कर रहे हैं, जबकि सेल की अन्य इकाइयाँ भी समान पर्यावरण-केंद्रित पहलों पर कार्यरत हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) श्री राकेश कुमार के कार्यालय में किए गए। संयंत्र की ओर से मुख्य महाप्रबंधक (ऊर्जा प्रबंधन) श्री पी.वी.वी.एस. मूर्ति ने दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधकों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वहीं, एंटिटी 1 वैल्यू इमिशन्स प्रा. लि. के संस्थापक एवं तकनीकी आविष्कारक श्री कौशिक पलिचा और अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
पहल के तहत 1 टन प्रतिदिन क्षमता वाले उन्नत रिएक्टर की स्थापना की जाएगी, जो फ्लू गैसों की संपूर्ण धारा का उपचार करने में सक्षम होगा। पारंपरिक कार्बन कैप्चर तकनीकों से आगे बढ़ते हुए यह रिएक्टर उत्सर्जन को राजस्व-सृजन सक्षम उत्पादों में बदलने की दिशा में नवाचार प्रस्तुत करता है। इसे भिलाई संयंत्र परिसर में स्थापित कर प्रारंभिक परीक्षणों से इसकी वाणिज्यिक संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।
कार्यक्रम की शुरुआत महाप्रबंधक (ऊर्जा प्रबंधन विभाग) और परियोजना समन्वयक श्री अजय गाजघटे के स्वागत उद्बोधन से हुई। इसके बाद कौशिक पलिचा ने रिएक्टर की तकनीकी विशेषताओं का विस्तृत परिचय देते हुए बताया कि यह तकनीक फ्लू गैसों के सम्पूर्ण उपचार में सक्षम है। समापन में मूर्ति ने परियोजना के आगे के रोडमैप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल भिलाई इस्पात संयंत्र को पर्यावरण-मित्र उत्पादन की नई दिशा प्रदान करेगी।


















