लालगंज, मीरजापुर 19 नवंबर (आरएनएस )। विंध्य क्षेत्र के प्रमुख जल स्रोतों—विंध्यम फॉल, सिरसी डैम, फॉल और ददरी (मेजा) डैम का दिनभर मैदानी अध्ययन करने के बाद प्रयागराज नैनी स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की टीम मंगलवार सांयकाल लालगंज खजुरी पहुंची। जहां विद्यार्थियों ने अपने-अपने अध्ययन निष्कर्षों की विस्तार से प्रस्तुति दी। दौरे में शामिल प्रो. अरुण कुमार, प्रो. नीतू सिंह और प्रो. दीपक श्रीवास्तव ने पूरे भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को बांधों की संरचना, जलाशयों की जल-धारण क्षमता और प्राकृतिक भू-जल रिचार्ज की प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया। प्राध्यापकों ने बताया कि पहाड़ी जलस्रोतों और बरसाती नदियों पर बने बांध क्षेत्रीय जल-स्तर को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं संरचनाओं से संचित जल आगे चलकर पेयजल, सिंचाई और ग्रामीण जलापूर्ति का आधार बनता है। मैदानी निरीक्षण में टीम ने जल प्रवाह की दिशा, रिसाव वाले बिंदु, बांधों के रखरखाव, वर्षा जल संग्रहण तकनीक और कृत्रिम जलाशयों के प्रभाव जैसे बिंदुओं पर अध्ययन किया। सायंकालीन ब्रीफिंग में छात्र–छात्राओं ने अलग-अलग समूहों में डैम की गहराई, स्टोरेज क्षमता, मौसमी जलस्तर उतार-चढ़ाव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपयोग की स्थिति पर अपनी-अपनी रिपोर्ट रखी। भ्रमण दल का मानना रहा कि इस प्रकार का अध्ययन विद्यार्थियों में जल संरक्षण की वैज्ञानिक समझ और जिम्मेदार व्यवहारिक दृष्टि दोनों को मजबूत करता है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

