अयोध्या 26 नवंबर (आरएनएस ) डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभाग द्वारा आधुनिक युग में मानव जीवन पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रभाव विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता ओसाका विश्वविद्यालय जापान के प्रो. विकास पाण्डेय रहे। व्याख्यान का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा शिक्षकों को तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया के प्रति संवेदनशील बनाना और एआई के विभिन्न उपयोगों व चुनौतियों से परिचित कराना था। प्रो. विकास पाण्डेय अपने वक्तव्य में बताया कि एआई केवल तकनीकी क्रांति नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन भी है, जो मानव जीवन के सभी आयामोंकृशिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, उद्योग, संचार तथा प्रशासनकृको गहराई से प्रभावित कर रहा है। उन्होंने भविष्य में रोजगार के स्वरूप में आने वाले परिवर्तन, एआई आधारित कौशलों की बढ़ती मांग, दैनिक जीवन में एआई उपकरणों की उपयोगिता, डिजिटल युग में नैतिकता, गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ, युवाओं के लिए एआई को समझना क्यों आवश्यक है जैसे प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला। डॉ. पाण्डेय ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सही दिशा में तकनीक का उपयोग भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी राष्ट्र बना सकता है। संगोष्ठी में डॉ. रवि तिवारी ने अयोध्या के विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्मार्ट प्रशासन, पर्यटन प्रबंधन, यातायात प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाएँ तथा शैक्षणिक सुधार के क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस प्रकार से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि डिजिटल मैपिंग, वर्चुअल असिस्टेंट, फेस रिकॉग्निशन आधारित सुरक्षा प्रणाली और इंटेलीजेंट डेटा एनालिटिक्स अयोध्या को आधुनिक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने में महत्त्वपूर्ण होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र मिश्र ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीक नहीं बल्कि भविष्य की भाषा है। जिसे समझना और अपनाना समय की मांग बन चुकी है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और तकनीकी दक्षता के लिए प्रेरित किया। संगोष्ठी का समापन धन्यवाद ज्ञापन रत्नेश यादव ने किया। इस अवसर पर विनीता पटेल, श्रीमती शालिनी पांडेय, विनीत पाण्डेय, निदेशक, रण फाउंडेशन, सौरभ मिश्रा एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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