अयोध्या,26 नवंबर (आरएनएस)। रामजन्मभूमि मंदिर परिसर में 25 नवंबर 2025 को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम सम्पन्न हो गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. मृदुल शुक्ल को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, जहाँ उन्होंने सहभागिता दर्ज की।
डॉ. मृदुल शुक्ल 1990 के दशक में अयोध्या में हुए मंदिर निर्माण आंदोलन के सक्रिय सदस्यों में शामिल रहे हैं। सन 1994 से 1997 तक उन्होंने एक संगठन के कमांडर के रूप में जनजागरण और रैलियों का संचालन किया था। उस दौरान अयोध्या की गलियों में नियमित शोभायात्राएँ और संकल्प कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते थे। विभिन्न संतों, सामाजिक नेताओं और संगठनों की मौजूदगी में राम मंदिर निर्माण से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी समर्थन अभियान चलाया गया, जिसमें सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
वर्तमान समय में डॉ. मृदुल शुक्ल ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान को सरल भाषा में समझाने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के कार्य में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। वे सीएसआईआर-एनबीआरआई, लखनऊ में अधिकारी हैं और पिछले दो दशकों में हजारों विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर चुके हैं। सप्ताहांत में वे गांवों, स्कूलों और इंटर कॉलेजों में जाकर वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान देते हैं, जिनसे कई ग्रामीण महिलाओं को विज्ञान आधारित कार्यों से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है।
विज्ञान संचार, शोध और ग्रामीण वैज्ञानिक विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें सरजू रत्न पुरस्कार, भारत विभूषण पुरस्कार, विज्ञान गौरव सम्मान, लैब टू लैंड अवार्ड, युवा वैज्ञानिक पुरस्कार (उत्तर प्रदेश सरकार), एनबीआरआई बेस्ट रिसर्च पेपर अवार्ड और अटल बिहारी वाजपेयी वैज्ञानिक आउटरीच उत्कृष्टता सम्मान सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनके शोध अनेक अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ. शुक्ल ने लखनऊ के कल्ली गाँव में 10 किलोमीटर ग्रीन बेल्ट परियोजना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी पुस्तक पेड़-पौधों द्वारा गंगा प्रदूषण प्रबंधन भी काफी चर्चित रही है। विज्ञान भारती सहित कई संगठनों के सहयोग से वे लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। कई शिक्षाविदों ने उन्हें उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में गिना है जो विज्ञान का सीधा लाभ गाँवों तक पहुँचाने के उद्देश्य से निरंतर कार्यरत हैं।
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