100 ग्राम वजन की रजाइयाँ बन रही आकर्षण का केन्द्र।
# सात पीढ़ियों की विरासत झलकती है इन जयपुरी रजाइयों में।
नई दिल्ली, 26 नवम्बर (आरएनएस)। प्रगति मैदान में चल रहे 44वें अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला के राजस्थान मंडप में जयपुरी रजाइयों को आगंतुकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है और उनके हल्के वजन, कोमलता एवं गर्माहट की ख़ासियत के लिये भरपूर सराहना की जा रही है। मंडप में राजस्थानी रजाइयों की व्यापक एवं भरपूर रेंज उपलब्ध है। राजस्थान मंडप में जयपुरी रजाइयों के स्टॉल संचालक अब्दुल रऊफ ने बताया कि मात्र 100 ग्राम वजन से तैयार जयपुरी रजाइयों को आगंतुक काफी पसंद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जयपुरी रजाइयाँ बनाना मंसूरी समाज का वंशानुगत व्यवसाय है और इसे वे पिछली सात–आठ पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। इसे बनाने में घर के बुजुर्गों से लेकर महिलाएँ भी अपना पूर्ण योगदान देती हैं।
उन्होंने बताया कि जयपुर के मंसूरी समाज के लोग सर्दी के मौसम में घरेलू उपयोग में आने वाले सभी प्रकार के उत्पाद बनाते हैं, लेकिन रजाई बनाने में उन्हें विशेष योग्यता प्राप्त है। सर्दियों में दैनिक उपयोग के लिये रजाई की उच्च गुणवत्ता का उत्पादन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने बताया कि रजाइयों को आधुनिक, फैशनेबल एवं राजस्थानी डिज़ाइनों में बनाया जा रहा है, जिसे ग्राहकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने बताया कि ग्राहकों के लिये अलग-अलग आकृति और आकार में रजाइयाँ 500 से 5000 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं।
मोहम्मद हुसैफ ने बताया कि जयपुरी रजाइयों के अतिरिक्त स्टॉल पर रूई से बनी जैकेट्स की भी बिक्री की जा रही है, जिसकी रेंज 800 रुपये से 2000 रुपये तक रखी गई है।
आईआईटीएफ 2025 में राजस्थान मंडप में महिलाओं की यह सक्रिय और प्रेरक भागीदारी यह प्रमाणित करती है कि राज्य की नीतियाँ और ग्रामीण उद्यमिता मॉडल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। राजस्थान सरकार की पहलें न केवल स्थानीय शिल्प को वैश्विक पहचान दिला रही हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर को भी ऊपर उठा रही हैं।

