मेरठ 27 नवंबर (आरएनएस ) किसानों का गुस्सा आज कलेक्ट्रेट पर फूटा। भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में किसानों की भीड़ कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा तो माहौल पूरी तरह किसान आंदोलन की गर्मी में बदल गया। किसान एकता जिंदाबाद और हमारा हक दो के नारों के बीच किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित 12 सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी को सौंपा। पंचायत अध्यक्ष चौधरी जगबीर भी पूरे समय किसानों के साथ डटे रहे। किसानों का सबसे बड़ा दर्द गन्ने के दाम और भारी ढुलाई भाड़े को लेकर रहा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भले ही सरकार ने गन्ने का मूल्य 8 प्रतिशत बढ़ाया हो, लेकिन ढुलाई भाड़ा 33.33 प्रतिशत बढ़ाने से किसान को जमीन पर केवल 388 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहा है। यह वृद्धि नहीं, नुकसान है, किसान नेताओं ने कहा और मांग की कि ढुलाई भाड़े की दर कम की जाए।इसके साथ ही अस्वीकृत प्रजाति के गन्ने का मूल्य बढ़ाए बिना समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का लाभ आधा ही रह जाता है, क्योंकि मेरठ के हजारों किसानों के खेतों में अभी भी ये प्रजातियां खड़ी हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अस्वीकृत प्रजाति का मूल्य नहीं बढ़ाया गया तो उन्हें बड़ा आर्थिक झटका लगेगा। गांवों में बिजली विभाग की एकमुश्त समाधान योजना में आटा चक्की, तेल क्रेशर जैसे छोटे ग्रामीण उद्योगों को शामिल न किए जाने पर भी किसानों ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ये छोटे उद्योग किसानों की रोजग़ार मशीन हैं, इन्हें योजना में शामिल करना जरूरी है।
सड़कों के मुद्दे पर किसानों ने साफ कहा— गन्ना विभाग की सड़कें पीडब्ल्यूडी को दे दी गई हैं, लेकिन निर्माण अधूरा है। बारिश में खेतों तक पहुंचना मुसीबत बन जाता है। किसानों ने मांग की कि इन सड़कों का शत-प्रतिशत निर्माण कार्य तुरंत कराया जाए और सिंचाई विभाग को भी पर्याप्त बजट देकर ग्रामीण मार्गों को ठीक कराया जाए।
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