कोलकाता 28 नवंबर (आरएनएस)। एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग व बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के बीच भीषण तौर पर ठन गई है। बंगाल की ममता सरकार के अनुसार काम के दबाव के कारण एक और बीएलओ की मौत हुई है। वहीं दावा किया जा रहा है कि, अबतक एसआईआर को लेकर मृतकों के संख्या कुल 33 हो गई है। लेकिन बीएलओ की मौतों को लेकर राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में टीएमसी सांसदों ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। टीएमसी नेताओं ने चुनाव आयोग को 40 मौतों की सूची सौंपी है। उक्त टीएमसी नेताओं ने कहा कि 18 बीएलओ की मौत सीधे तौर पर एसआईआर की वजह से हुई है। टीएमसी नेताओं ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि ‘आपके हाथ खून से रंगे हैंÓ। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतना चाहते हैं, लेकिन यह हम होने नहीं देंगे। इससे पहले दिल्ली में चुनाव आयोग के साथ प्रतिनिधिमंडल की करीब 2 घंटे बैठक चली। सांसद डेरेक ओÓब्रायन ने मुलाकात के बाद कहा, तृणमूल कांग्रेस के 10 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम से मुलाकात की। हमने सबसे पहले उन्हें एसआईआर प्रक्रिया की वजह से करीब 40 मरे हुए लोगों की लिस्ट सौंपी। हमने बैठक की शुरुआत यह कहकर की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के हाथ खून से रंगे हैं। डेरेक ओÓब्रायन ने हैरत प्रकट करते हुए कहा कि, हमने ज्ञानेश कुमार से 5 सवाल पूछे और हमें अपने पांचों सवालों में से किसी का भी जवाब नहीं मिला. जो कुछ भी हुआ उसकी आउटलाइन यही है। बता दे कि, टीएमसी के इस प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा सांसद शताब्दी रॉय, कल्याण बनर्जी, प्रतिमा मंडल, सजिदा अहमद और महुआ मोइत्रा शामिल थे। राज्यसभा सांसद डोला सेन, ममता ठाकुर, साकेत गोखले और प्रकाश चिक बारिक भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
इधर प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहीं तृणमूल की वरीय सांसद शताब्दी रॉय ने बताया कि, हमलोगों ने चुनाव आयुक्त से पांच अहम सवाल किए। जिसमे पहला सवाल यह था कि क्या यह एसआईआर क्या घुसपैठियों को रोकने के लिए है? अगर ऐसा है, तो बंगालियों को अलग से क्यों लक्ष्य किया जा रहा है? पूरे देश में बंगालियों पर हमले क्यों हो रहे हैं? मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में एसआईआर क्यों नहीं किया जा रहा है? कहा जा रहा है कि एसआईआर गैर-कानूनी वोटरों को चुनने के लिए है, तो इन गैर-कानूनी वोटरों द्वारा चुनी गई मोदी सरकार की क्या लेजिटिमेसी है? शताब्दी के आगे के सवाल थे,अब तक एसआईआर की वजह से 40 लोगों की मौत हो चुकी है। क्या कमीशन उन मौतों की जि़म्मेदारी लेगा? कमीशन उनके परिवारों के लिए क्या एक्शन ले रहा है? तृणमूल ने एसआईआर के बारे में जो शिकायतें की हैं, उन पर अब तक क्या एक्शन लिया गया है?
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