0-राज्य के नेताओं ने अंदरूनी कलह की वजह से चुनाव में हार की बात कही
नई दिल्ली ,28 नवंबर (आरएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार टीम को भरोसा दिलाया कि सुधार के कदम उठाए जाएंगे. राज्य के नेताओं ने 27 नवंबर को एक रिव्यू मीटिंग के दौरान विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के लिए अंदरूनी लड़ाई, टिकटों की बिक्री, सहयोगी दलों के साथ खराब तालमेल, दोस्ताना लड़ाई और फंड के गलत इस्तेमाल को वजह बताया था.
मीटिंग के बाद एआईसीसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि कई अंदरूनी दिक्कतें थीं. कई मामलों में, उम्मीदवार अकेले थे और पार्टी से सपोर्ट सिस्टम नहीं था. इतना ही नहीं कैंपेन के दौरान हमारी सीटों पर सीनियर नेताओं का बंटवारा बराबर नहीं था. पार्टी फंड के बंटवारे और फ्रेंडली फाइट से जुड़ी कई शिकायतें थीं.
उन्होंने कहा, कुछ नेताओं पर नए चेहरों को हराने के लिए काम करने का आरोप लगाया गया. उन्होंने बताया कि रिव्यू सेशन से पहले, एक कैंडिडेट ने दूसरों को तीखी बहस के बीच गोली चलाने की धमकी दी थी.
पार्टी के अंदर के लोगों के मुताबिक, रिव्यू के दौरान इंडिया गठबंधन को नुकसान पहुंचाने वाले बाहरी कारणों में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम का असर, जिसने सीमांचल इलाके में 5 सीटें जीतीं और पूरे राज्य में ध्रुवीकरण में योगदान दिया, और वह स्कीम जिसके तहत योग्य महिला वोटरों को हर महीने 10,000 रुपये दिए गए, का जि़क्र भी किया गया.
राहुल और कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खडग़े ने 10-10 के छोटे ग्रुप में पार्टी प्रत्याशी से मुलाकात की और चुनाव में हार के कारणों को समझने के लिए उनसे बातचीत की. इस बारे में बिहार के एआईसीसी सचिव और प्रभारी सुशील पासी ने बताया, यह एक विस्तृत समीक्षा बैठक थी. इसमें कई सुझाव आए हैं. अब एआईसीसी भविष्य के लिए एक रोडमैप बनाएगी. सुधार के उपाय भी किए जाएंगे.
समीक्षा के बाद, राहुल ने प्रदेश टीम से ब्लॉक स्तर पर फिर से इक_ा होने और एनडीए सरकार को उसके चुनावी वादों, खासकर महिला वोटरों को हर महीने 10,000 रुपये देने के वादे के लिए जवाबदेह ठहराने को कहा.
वरिष्ठ राज्य कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने बताया, एनडीए सरकार ने वोटर्स से कुछ वादे किए थे. हम जानते हैं कि वे उन्हें पूरा नहीं कर पाएंगे. उन्होंने वोटिंग के दौरान एक लिमिटेड प्रयोग किया, जबकि मॉडल कोड लागू था. हम चाहते हैं कि वे महिलाओं को 2 लाख रुपये दें, जैसा कि पोलिंग बूथ पर वोटर्स से कहा गया था. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर वोटरों को इस बारे में बताएगी. लोग परेशान हैं और उनकी मदद करना हमारी जि़म्मेदारी है. यह बीजेपी की आम चाल है. वे राज्य चुनावों से पहले लुभावने वादे करते हैं और बाद में उन्हें भूल जाते हैं. राजस्थान और दिल्ली ऐसे उदाहरण हैं, जहां वादा किया गया महिला भत्ता और 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर अभी तक नहीं देखा गया है.
इंडिया गठबंधन को सत्ताधारी एनडीए की 202 सीटों के मुकाबले सिर्फ 35 सीटें मिलीं. कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन सिफऱ् 6 सीटें जीतीं. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि अधिकतर राज्य नेताओं ने अकेले चलने का सुझाव दिया और कहा कि कांग्रेस को अपने संगठनात्मक गैप पर ध्यान देने की जरूरत है. पासी ने कहा, अब राज्य, जिला और ब्लॉक लेवल की टीमें बनाने की ज़रूरत है ताकि हमारे पास ज़मीन पर एक बेसिक संगठनात्मक ढांचा हो.
अंदर के लोगों ने कहा कि पार्टी का एक हिस्सा बिहार में एआईसीसी और राज्य लीडरशिप में बदलाव के लिए दबाव डालेगा, लेकिन इसकी उम्मीद कम है. इसका मतलब है कि एआईसीसी इंचार्ज कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार अभी बने रह सकते हैं.
पूर्व राज्य इकाई प्रमुख अखिलेश प्रसाद सिंह ने बताया, हमें उम्मीद है कि पार्टी में नई चीजें होंगी और हमें भविष्य में ऐसी हार का सामना नहीं करना पड़ेगा. खराब नतीजों के कारणों पर लंबी चर्चा हुई.
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को गठबंधन का उप मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा को राज्य के कई नेताओं ने गलती बताया. अंदर के लोगों ने बताया कि यह भी देखा गया कि गठबंधन का वोट शेयर लगभग पहले जैसा ही था, लेकिन स्ट्राइक रेट (यह किसी चुनाव में किसी पार्टी द्वारा लड़ी गई कुल सीटों में से जीती गई सीटों के हिस्से को दर्शाता है) खराब था.
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