बिलासपुर 1 दिसंबर 2025(आरएनएस) एनटीपीसी सीपत क्षेत्र के पाँच किलोमीटर दायरे में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य स्थिति का व्यापक मूल्यांकन शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की टीम जिसमें चिकित्सक और पीजी विद्यार्थी शामिल हैं।टीम ने प्रभावित क्षेत्र में घर घर जाकर स्वास्थ्य सर्वेक्षण प्रारंभ कर दिया है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि ताप विद्युत परियोजना के संचालन और उससे उत्सर्जित प्रदूषण का स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर कितना प्रभाव पड़ा है। सर्वे के दौरान प्रत्येक परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है, ताकि ग्रामीणों की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन इस शोध का मकसद ग्रामीणों की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति का आंकलन करना, क्षेत्र में मौजूद स्थानिक रोगों की पहचान करना और सामाजिक, जनसांख्यिकीय परिस्थितियों का विश्लेषण करना है। अध्ययन से प्राप्त जानकारी के आधार पर स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को वैज्ञानिक सिफारिशें भेजी जाएंगी, जिनका उपयोग ग्रामीणों के लिए दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाएं बनाने में किया जाएगा।
ताप विद्युत परियोजना से जुड़े रोगों का चलेगा पता
इस सर्वे से यह स्पष्ट हो सके कि किन बीमारियों की अधिकता है और उनका संभावित कारण क्या हो सकता है। सिम्स के डीन रमणेश मूर्ति के अनुसार, एनटीपीसी सीपत प्रदेश का प्रमुख कोयला आधारित बिजली संयंत्र है, जो प्रतिदिन लगभग 42,000 मीट्रिक टन कोयले का उपयोग करता है। कोयले का खनन, परिवहन, दहन और फ्लाई ऐश का निपटान ये सभी प्रक्रियाएं पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए जोखिमपूर्ण मानी जाती हैं। उन्होंने बताया कि सूक्ष्मकण (10 माइक्रोमीटर से छोटे कण) फेफड़ों, हृदय और रक्तप्रवाह पर गंभीर बीमारी पैदा करने की क्षमता रखते हैं। एनएफएचएस-5 रिपोर्ट में भी इस इलाके में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया और मलेरिया जैसी बीमारियों की दर अधिक पाई गई है। बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और बौनापन की स्थिति भी चिंताजनक है। यह क्षेत्र कई प्रकार के जूनोटिक रोगों के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील मना जाता है। डीन ने बताया कि सर्वे एक से दो महीनों तक चलेगा, जिसके बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अध्ययन के परिणामें से यह स्पष्ट होगा कि ताप विद्युत परियोजना से किन-किन रोगों का खतरा बढ़ रहा है और प्रभावित लोगों के लिए किस प्रकार की चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता है। अध्ययन पूरा होने पर परियोजना से जुड़े अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी जाएगी, ताकि आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
अध्ययन से मिलेगा सही इलाज का आधार
सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के अनुसार, सीपत क्षेत्र औद्योगिक जोन होने के कारण पर्यावरणीय जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह अध्ययन ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर वास्तविक प्रभावों को उजागर करेगा और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एचओडी हेमलता ठाकुर ने बताया कि यह अध्ययन न केवल बीमारियों की स्थिति बताएगा बल्कि सामाजिक परिस्थितियों, पर्यावरणीय प्रदूषण और स्थानिक रोगों के आपसी संबंध को भी वैज्ञानिक रूप से सामने लाएगा। प्राप्त डेटा बच्चों में पोषण संबंधी समस्याओं के समाधान, रोग नियंत्रण रणनीतियों और पर्यावरणीय सुधारों के लिए पुख्ता आधार बनेगा।

