चित्रकूट 9 दिसंबर (आरएनएस)। बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता शिवबाबू वर्मा ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया में सुधार को लेकर आज संसद में हुई चर्चा में बी.एस.पी. की ओर से तीन प्रमुख सुधार की मांग की गई।
प्रमुख सुधार में एस.आई.आर. की प्रक्रिया के लिए अधिक समय की मांग करते हुए कहा गया कि इसमें मतदाता सूची में नाम भरने की जो भी प्रक्रिया होनी है, उसके लिए निर्धारित समय सीमा बहुत ही कम है, जिसकी वजह से बीएलओ के ऊपर काफी दबाव है और कई बीएलओ काम के दबाव के वजह से अपनी जान भी गवां चुके हैं। जहाँ करोड़ों मतदाता हैं वहाँ बीएलओ को उचित समय मिलना चाहिए। उत्तर प्रदेश में लगभग 15.40 करोड़ से भी ज्यादा मतदाता हैं और अगर वहां एस.आई.आर. का कार्य जल्दबाजी में पूरा करने की कोशिश की जायेगी तो इसका नतीजा यह होगा कि अनेकों वैध-मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हट जायेगा और वोट डालने के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो जाएंगे, जो पूर्ण रूप से अनुचित होगा। अत: ऐसे मे एस.आई.आर. की प्रक्रिया को पूरी करने में जल्दबाजी न करते हुए उचित समय दिया जाना चाहिए।
इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार चुनाव आयोग द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। ऐसे लोग जिनका कोई भी आपराधिक इतिहास है, उन्हें अपने हलफनामें में इसका अपने आपराधिक इतिहास का पूरा ब्यौरा देना होगा और इसके साथ-साथ स्थानीय अखबारों में भी इसका पूरा विवरण भी प्रकाशित करना होगा तथा जिस राजनैतिक पार्टी से वे चुनाव लड़ रहे हैं, उस राजनैतिक पार्टी की भी जिम्मेदारी होगी कि वह इस सूचना को अपने स्तर से भी राष्ट्रीय अखबारों में भी प्रकाशित करेगी। इस सम्बन्ध में बीएसपी का कहना है कि अक्सर यह पाया गया है कि जिस व्यक्ति को चुनाव लडऩे के लिए टिकट व सिम्बल दिया जाता है, उनमें से कुछ लोग अपना आपराधिक इतिहास पार्टी को नहीं बतातें हैं तथा कुछ लोगों के सम्बन्ध में स्क्रूटनी के समय ही पार्टी को इसका पता लग पाता है, जिसकी वजह से इसकी जिम्मेवारी पार्टी के ऊपर आ जाती है और वैसे भी ऐसे प्रत्याशियों के आपराधिक इतिहास को राष्ट्रीय अखबारों में छपवाने की जिम्मेवारी पार्टी के ऊपर डाली गयी है। जबकि इस सम्बन्ध में हमारी पार्टी का यह सुझाव है कि आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के सम्बन्ध में सभी औपचारिकताएं पूरी करने की जिम्मेदारी उन्हीं पर डालनी चाहिये न कि पार्टी के ऊपर होनी चाहिये। और अगर आगे चलकर यह मालूम होता है कि किसी प्रत्याशी नेे अपना आपराधिक इतिहास छुपाया है तो इससे सम्बंधित हर प्रकार की कानूनी लायबिलिटी और जिम्मेदारी भी उसी पर आनी चाहिये न कि पार्टी के ऊपर।
इसके अलावा पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का सुझाव है कि ई.वी.एम. के द्वारा उसमें लगातार उठती गड़बडिय़ों की शिकायत जो चुनाव के दौरान और उसके बाद व्यक्त की जाती है, उसे दूर करने के लिए और चुनाव प्रक्रिया में सभी का पूर्ण रूप से विश्वास पैदा करने के लिए अब ई.वी.एम. के द्वारा वाटे डलवाने की जगह पुन: बैलेट पेपर से ही वोट डलवाने की प्रक्रिया लागू की जाये और अगर किसी वजह से ऐसा अभी नहीं किया जा सकता है तो कम से कम वीवीपैट के डब्बे में जो वोट डालते समय पर्ची गिरती है, उन सभी पर्चियों की गिनती सभी बूथों में करके ई.वी.एम. के वोटों से मिलान किया जाये। ऐसा ना करने का जो कारण निर्वाचन आयोग द्वारा बताया जाता है, कि इसमें काफी समय लग जायेगा, जबकि इनका यह तर्क बिलकुल भी उचित नहीं है। क्योंकि अगर सिर्फ कुछ और घन्टे गिनती में लग जाते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पडऩा चाहिये, जबकि वोट डालने की चुनाव प्रक्रिया महीनों चलती है और यह इसलिए भी जरूरी है कि इससे देश की आमजनता का चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा तथा इस प्रकार के जो अनेकों प्रकार के सन्देह उत्पन्न होते हैं उनपर भी पूर्ण विराम लगेगा, जो देश हित में होगा।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

