जापान ,10 दिसंबर । जापान में मंगलवार को एक बार फिर भीषण भूकंप ने तबाही मचाई। होक्काइडो के दक्षिण में आओमोरी के पूर्वी तट पर आए 7.5 तीव्रता के भूकंप से कई स्थानों पर नुकसान हुआ। इस झटके में 34 लोग मामूली रूप से घायल हुए, जबकि कुछ सड़कों और इमारतों को सीमित क्षति पहुँची है।
लेकिन इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (छ्वरू्र) ने इस घटना के बाद एक दुर्लभ महाभूकंप की चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, छ्वरू्र ने चेतावनी दी है कि आने वाला सप्ताह अत्यंत संवेदनशील है और इस दौरान **8 या उससे अधिक तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप** आ सकता है। यह चेतावनी किसी पूर्वानुमान पर आधारित नहीं है, बल्कि मौजूदा भूकंपीय गतिविधि को देखते हुए खतरे का स्तर बढ़ा हुआ माना जा रहा है।
क्यों बढ़ा है उत्तर जापान में खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार का 7.5 तीव्रता वाला झटका उसी क्षेत्र में आया है जहां प्रशांत प्लेट जापान के नीचे खिसकती है। यह इलाका—जापान ट्रेंच और चिशिमा ट्रेंच के आसपास—देश के कई बड़े ऐतिहासिक भूकंपों का केंद्र रहा है। 2011 की विनाशकारी सुनामी और फुकुशिमा परमाणु हादसा भी इसी क्षेत्र में हलचल के कारण हुआ था। छ्वरू्र ने यह भी याद दिलाया कि 2011 के 9.0 तीव्रता वाले महाभूकंप से ठीक दो दिन पहले 7.3 तीव्रता का भूकंप आया था—जो इस सप्ताह दर्ज गतिविधि से काफी मिलता-जुलता पैटर्न है।
कितनी भीषण हो सकती है संभावित आपदा?
सरकारी अनुमानों में चेतावनी दी गई है कि यदि इस क्षेत्र में एक और अपतटीय महाभूकंप आता है, तो इससे:
* 30 मीटर (98 फीट) तक ऊँची सुनामी उठ सकती है
* 1,99,000 से अधिक लोगों की जान जा सकती है
* 2,20,000 से अधिक निर्माण ढांचे नष्ट हो सकते हैं
* लगभग 31 ट्रिलियन येन (198 बिलियन डॉलर) का आर्थिक नुकसान हो सकता है
* सर्दियों में ऐसी आपदा होने पर 42,000 तक लोग हाइपोथर्मिया का शिकार हो सकते हैं
किन क्षेत्रों के लिए जारी हुआ अलर्ट?
यह व्यापक चेतावनी होक्काइडो से लेकर चिबा प्रान्त तक की 182 नगर पालिकाओं के लिए जारी की गई है। हाल के वर्षों में यह क्षेत्रीय स्तर पर जारी किए गए सबसे बड़ा और सबसे विशिष्ट परामर्श माना जा रहा है। पिछले साल दक्षिणी जापान में जारी की गई “नानकाई ट्रफ” महाभूकंप चेतावनी से स्थिति में अफरातफरी फैल गई थी, क्योंकि उसका दायरा अस्पष्ट था। लेकिन इस बार छ्वरू्र ने बेहद स्पष्ट और सावधानीपूर्ण जानकारी साझा की है ताकि लोग डरें नहीं बल्कि तैयार रहें।
अधिकारियों ने लोगों से आग्रह किया है कि वे:
* आपातकालीन किट तैयार रखें
* समुद्री तटीय इलाकों में सतर्क रहें
* आवश्यकता पडऩे पर तत्काल निकासी के निर्देशों का पालन करें
2011 की त्रासदी को देखते हुए, यह चेतावनी लोगों को सबसे बुरे हालात के लिए मानसिक और व्यावहारिक तौर पर तैयार करने की कोशिश है।
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