कुशीनगर, 10 दिसम्बर (आरएनएस)। अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कुशीनगर स्थान पडरौना की अदालत द्वारा चार वर्षीय लड़के के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म करने के आरोपी को अधिकतम 20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा तीन लाख रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। साथ ही अर्थदण्ड की धनराशि में से 80 प्रतिशत धनराशि नाबालिक पीडि़त को जरिये नैसर्गिक संरक्षक, वादी मुकदमा को चिकित्सा व्यय व पुनर्वास की पूर्ति के लिए प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया गया है।
अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट दिनेश कुमार के न्यायालय में विशेष सत्र परीक्षण संख्या-469/2025. सरकार बनाम रिशु सैनी उर्फ दुर्गेश सैनी, मुकदमा अपराध संख्या-356/2024, धारा- एस एम /6 पाक्सो एक्ट, थाना- तरयासुजान विशेष सत्र परीक्षण संख्या-469/2025, सरकार बनाम रिशु सैनी उर्फ दुर्गेश सैनी, मुकदमा अपराध संख्या-356/2024, धारा- 5 एम /6 पाक्सो एक्ट, थाना तरयासुजान वादी मुकदमा एक्स व पीडित वाई (पहचान छिपाने के उद्देश्य से परिवर्तित नाम) इस आशय का अभियोग अभियुक्त रिशु सैनी उर्फ दुर्गेश सैनी के विरूद्ध थाना तरयासुजान में पंजीकृत कराया कि बीते 7.10.2024 समय दोपहर के 12.30 बजे वादी मुकदमा की नाबालिक लड़?का पीडि़त दुर्गा मन्दिर पर खेल रहा था कि अभियुक्त रिशु सैनी उर्फ दुर्गेश सैनी के द्वारा उसे घसीटते हुए बांसबारी में ले जाकर उसके साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म बनाया गया।अभियोजन की तरफ से 09 साक्षी न्यायालय में परीक्षित कराये गये। न्यायालय के द्वारा अपने निर्णय में अभियुक्त को आरोपित अपराध में दोषी पाया गया। न्यायालय ने पीडि़ता का साक्ष्य पूरी तरह से विश्वसनीय पाते हुए अपने निर्णय में टिप्पणी की गयी कि ‘अभियुक्त रिशु सैनी उर्फ दुर्गेश सैनी के द्वारा मात्र चार वर्षीय अबोध बालक के साथ अपने पूरे हॉशो-हवाश में अप्राकृतिक मैथुन किया गया। पीडित को उसके जीवन के शुरुआत में ही अभियुक्त के इस कृत्य से सम्पूर्ण जीवन उसके मन:मस्तिष्क पर इस बाद का गहरा आधात छिपा रहेगा कि इस दुनिया में अभियुक्त के रूप में दरिन्दें भी निवास करते हैं। जो सभ्य समाज के लिए घातक होतें है। अभियुक्त के कृत्य को देखते हुए इसे कठोर दण्ड से दण्डित किया जाना न्यायसंगत होगा। जिससे समाज में ऐसे अपराध पर रोक लगायी जा सके। अभियुक्त रिशु सैनी उर्फ दुर्गेश सैनी पुत्र स्व0 शारदा माली, साकिन तरयासुजान खास थाना तरयासुजान जिला कुशीनगर को अधिकतम 20 वर्ष के सश्रम दण्ड से दण्डित करते हुए अर्थदण्ड के रूप में कुल मु0-3,00,000/-रूपये के दण्ड से दण्डित किया। साथ ही सम्पूर्ण अर्थदण्ड की धनराशि में से 80 प्रतिशत धनराशि नाबालिक पीडि़त को जरिये नैसर्गिक संरक्षक/वादी मुकदमा को चिकित्सा व्यय व पुनर्वास की पूर्ति के लिए प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया। मुकदमे की पैरवी विशेष शासकीय अधिवक्ता पाक्सो एक्ट संजय कुमार तिवारी व सुनील कुमार मिश्र एवं पैरोकार तरतासुजान विपुल गौड़ के द्वारा की गई है।
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