—– अर्थ दण्ड के रूप में 3 लाख 10 हजार रुपए का लगा अर्थदण्ड।
कुशीनगर, 10 दिसम्बर (आरएनएस)। अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट कुशीनगर स्थान पडरौना की अदालत द्वारा नाबालिग लड़की के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म करने के आरोपी को अधिकतम 20 वर्ष के सश्रम कारावास के दण्ड से दण्डित करते हुए अर्थदण्ड के रूप में 3,10,000/-रूपये के दण्ड से दण्डित किया गया है। सम्पूर्ण अर्थदण्ड की 80 प्रतिशत धनराशि नाबालिक पीडि़त को जरिये नैसर्गिक संरक्षक, वादी मुकदमा को चिकित्सा व्यय व पुनर्वास की पूर्ति के लिए प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया गया है।
अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट दिनेश कुमार के न्यायालय में विशेष परीक्षण संख्या-504/2022, सरकार बनाम धुरूप राय, मुकदमा अपराध संख्या-93/2022, धारा-376.506 भा000 व चारा-3/4 पाक्सो थाना जटहां बाजार मे वादी एक्स पीडि़त (पहचान छिपाने के उद्देश्य से परिवर्तित नाम) इस आशय का अभियोग अभियुक्त धुरूप राय पुत्र रमाशंकर राय के विरुद्ध थाना जटहां बाजार में पंजीकृत कराया कि अभियुक्त के द्वारा बीते 07.06.2022 को समय 12.00 बजे रात्रि में जब वादी मुकदमा की नाबालिक लड़की, पीडिता शौचालय से निकल रही थी, कि मुंह दबाकर उसे गन्ने के खेत में ले गया। पीडि़ता के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध बलात्कार जैसा जघन्य अपराध कारित किया गया। पीडि़ता के चिल्लाने पर अभियुक्त के द्वारा उसे जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गया। अभि योजन की तरफ से 10 साक्षी न्यायालय में परीक्षित कराये गये। न्यायालय के द्वारा अपने निर्णय में अभियुक्त को अधिरोपित अपराध में दोषी पाया गया। पीडि़ता का साक्ष्य पूरी तरह से विश्वसनीय पाते हुए अपने निर्णय में टिप्पणी की गयी कि “किसी स्त्री का जीवन एक फूल की भाँति होता है और उसका शील उसकी महक होती है, लेकिन जब राक्षसों के द्वारा उसके जीवन को नष्ट कर दिया जाता है, तब उसकी महक समाप्त होती जाती है। यह भी मत न्यायालय द्वारा दिया गया है कि ‘पीडि़ता के साथ अभियुक्त के द्वारा बलात्कार का अपराध कारित कर न केवल उसके सम्पूर्ण नारीतत्व के मर्यादा पर आधात किया गया है। बल्कि इसके साथ पीडि़ता व उसके परिवार के सामाजिक सम्मान पर भी चोट पहुंचायी गयी है। जिसकी पीडि़ता व उसके परिवार को जीवनपर्यन्त रहेगी। न्यायालय ने अभियुक्त धुरूप राय पुत्र रमाशंकर राय, साकिन बाजूपट्टी थाना जटहां बाजार जिला कुशीनगर को अधिकतम 20 वर्ष के सश्रम कारावास के दण्ड से दण्डित करते हुए अर्थदण्ड के रूप में कुल मु0-3,10,000/-रूपये के दण्ड से
दण्डित किया गया है। सम्पूर्ण अर्थदण्ड की 80 प्रतिशत धनराशि नाबालिक पीडि़त को जरिये नैसर्गिक संरक्षक/वादी मुकदमा को चिकित्सा व्यय व पुनर्वास की पूर्ति के लिए प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया गया है। साथ ही न्यायालय ने इस आपराधिक विचारण में क्षेत्राधिकारी सदर के द्वारा विधि विज्ञान प्रयोगशाला गोरखपुर के संयुक्त निदेशक को पत्र दिनांक 14.11.2025 को इस आशय का प्रेषित किया गया था कि पीडि़ता के डी0एन0ए0 परीक्षण हेतु सैम्पल दिनांक 15.06.2022 को प्रेषित किये गये थे। जिस पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला की आख्या दिनांक 15.11.2025 को प्रेषित की गयी थी किन्तु अभी तक अभियोग परीक्षण क्रम पर नहीं आया है। जिस पर न्यायालय ने अपने निर्णय में यह चिन्ता जाहिर की करते हुए कहा है कि अधिकतर आपराधिक प्रकरण में कई सालों व्यतीत हो जाने के पश्चात् भी विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती है। जिस पर शासन व प्रशासन को गम्भीरता से विचार किये जाने की आवश्यकता है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला का कृत्य भी गैर जिम्मेदारी पूर्वक है। साढ़े तीन वर्ष के लम्बे समय के पश्वात् भी रिपोर्ट के लिए परीक्षण के क्रम में न आना शिथिल कार्यवाही को उजागर करता है। मुकदमे की पैरवी
विशेष शासकीय अधिवक्ता पाक्सो एक्ट संजय कुमार तिवारी व सुनील कुमार मिश्र के द्वारा की गई।
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