—- पिंजरापोल गौशाला मे आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दुसरे दिन कथावाचक ने बेल पत्र के महत्व, भस्म धारण करने व रुद्राक्ष की महिमा का कराया रसपान।
कुशीनगर, 10 दिसम्बर (आरएनएस)। शिव कैलाश परिवार के तत्वावधान मे पडरौना नगर के पिंजरापोल गौशाला प्रांगण आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दुसरे दिन बुधवार को वृंदावन से पधारे कथावाचक ने बेल पत्र के महत्व, भस्म धारण करने व रुद्राक्ष की महिमा का रसपान कराया।
कथावाचक प्रद्युम्न कृष्ण महाराज ने बताया कि बेलपत्र, भस्म और रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ है, जो सभी पापों का नाश कर, मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और अंत में मोक्ष प्रदान करते हैं ये भगवान शिव को प्रिय हैं और इन्हें लगाने से व्यक्ति शिवलोक प्राप्त करता है, साथ ही सांसारिक सुख, धन और आरोग्य भी मिलता है, और भूत-प्रेत जैसी बाधाएं दूर होती हैं, जिससे व्यक्ति श्रेष्ठ बन जाता है। उन्होने कहा कि बेलपत्र से पूजा करने पर सभी पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है। बेलपत्र के तीन पत्ते ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माने जाते हैं। बेलपत्र की जड़ के पास दीपक जलाने या भोजन कराने से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। कथावाचक ने कहा कि भस्म शिव का स्वरूप है और इसे लगाना शिवभक्त की पहचान है। ललाट पर भस्म लगाने से सांसारिक सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है, और व्यक्ति शिव का प्रिय हो जाता है। उन्होने रुद्राक्ष के महत्व बताते हुए कहा कि रुद्राक्ष भगवान शिव का अंश है और अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे धारण करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और सभी प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। रुद्राक्ष धारी के पास से भूत-प्रेत, डाकिनी-शाकिनी आदि दूर भागते हैं। रुद्राक्ष धारण करने वाले को समाज में मान-सम्मान, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और सभी देवता प्रसन्न होते हैं। कार्यक्रम में संस्था के सदस्य कुलदीप, पीयूष, बिक्की, विजय, अमन, मनीष गोयल, शिवशंकर, पिंजरापोल गौशाला के मंत्री अखिलेश गोयल,प्रदीप गोयल, ओमप्रकाश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
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