ऋषिकेश,10 दिसंबर (आरएनएस)। प्रसिद्ध कथावाचक देवी चित्रलेखा सपरिवार परमार्थ निकेतन पहुंची। वहां उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से भेंट वार्ता की और गंगा आरती भी की। बुधवार को परमार्थ निकेतन में प्रसिद्ध कथावाचक देवी चित्रलेखा अपने परिवार के साथ पहुंची। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज और साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में आयोजित दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज जब दुनिया एआई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर तेजी से बढ़ रही है। तब उतनी ही आवश्यकता है एसआई, सनातन इंटेलिजेंस और आरई, ऋषि इंटेलिजेंस की है। हमारे ऋषियों का चिंतन, उनका विज्ञान, उनका आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सबके कल्याण के सार्वभौमिक मंत्र वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि दुनिया इन सनातन सिद्धांतों दया, करुणा, न्याय, समानता, प्रकृति संरक्षण और सामूहिक कल्याण का अनुसरण करे, तो मानवाधिकार केवल घोषणाओं में नहीं, बल्कि जीवन में उतर आएंगे। देवी चित्रलेखा ने कहा कि परमार्थ गंगा तट से “सर्वे भवन्तु सुखिन:” का भाव केवल भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता दर्शन कर सकती है। परमार्थ निकेतन मेरा ही परिवार है, यहां आकर ऐसे लगाता है मानों मैं अपने घर लौट आयी हूं। उन्होंने कहा कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं हैं, वे स्वयं दिव्यता की सजीव अनुभूति हैं। महादेव की करूणा, गंगा रूप में धरा पर उतरकर हमें पवित्र करती है। भगवान श्रीकृष्ण का प्रेम गंगा की धारा बनकर संसार को अनवरत शीतलता और मधुरता देता है। भगवान श्री राम की मर्यादा इसी जल में प्रवाहित होकर हमें धर्म, संयम और कर्तव्य का संदेश देती है। यह केवल पानी नहीं, यह हमारे अस्तित्व, हमारी चेतना और हमारी संस्कृति का शाश्वत आधार है।
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