नई दिल्ली,12 दिसंबर (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यह साफ कर दिया कि वह चाहता है कि सब कुछ फेयर और बिना किसी भेदभाव के हो. साथ ही उसने तमिलनाडु सरकार की उस अर्जी को भी खारिज दिया, जिसमें कोर्ट के उस आदेश को बदलने की मांग की गई थी जिसमें करूर भगदड़ की जांच के लिए वन मैन इंक्वायरी कमीशन और स्ढ्ढञ्ज को सस्पेंड कर दिया गया था. बता दें कि करूर भगदड़ में 41 लोग मारे गए थे.
यह मामला जस्टिस जेके माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की फाइल की गई रिपोर्ट पर अपनी नाराजगी जाहिर की. बेंच ने कहा, हाई कोर्ट में कुछ गलत हो रहा है. हाई कोर्ट में जो हो रहा है वह सही नहीं है.
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की तरफ से सीनियर वकील पी विल्सन ने बेंच को भरोसा दिलाया कि राज्य का कमीशन सीबीआई जांच में दखल नहीं देगा. उन्होंने कहा कि कमीशन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ सुझाव देने तक ही सीमित रहेगा.
विल्सन ने कहा कमीशन उठाए जाने वाले कदमों की सिफारिश करेगा. यह जांच में दखल नहीं देगा… कमीशन की नियुक्ति का कारण, हमने साफ तौर पर कहा है कि जहां तक इस तरह की मीटिंग्स का सवाल है, हम कैसे शर्तें रख सकते हैं. क्या मुआवजा दिया जा सकता है… अगली बार ऐसा न हो, इसीलिए हम कमीशन नियुक्त कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि कमीशन भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए रोकथाम के उपाय सुझाने के लिए नियुक्त किया गया था. बेंच ने सीनियर वकील से कमीशन नियुक्त करने का नोटिफिकेशन पढऩे को कहा और कहा, हम चाहते हैं कि सब कुछ फेयर और बिना भेदभाव के हो. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी नहीं किया और न ही 13 अक्टूबर के अपने अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया.
जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने एक रिपोर्ट फाइल की है और कहा है कि हाई कोर्ट में कुछ गलत हो रहा है. हाई कोर्ट में जो हो रहा है, वह सही नहीं है. हमने रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट देखी है. हम इससे निपटेंगे. बेंच ने कहा कि उसने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की भेजी रिपोर्ट देखी है कि रैलियों के लिए एसओपी मांगने वाली एक रिट पिटीशन को क्रिमिनल रिट पिटीशन के तौर पर कैसे रजिस्टर किया गया.
राज्य की ओर से पेश हुए सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट की एक कॉपी मांगी और कहा कि वे जवाब फाइल करना चाहेंगे. दलीलें सुनने के बाद बेंच ने करूर भगदड़ मामले पर केके रमेश नाम के एक व्यक्ति की नई पिटीशन पर नोटिस जारी किया और पार्टियों से अपनी बात पूरी करने को कहा और मामले को फाइनल हियरिंग के लिए पोस्ट कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर को करूर भगदड़ के पीडि़त के परिवार से कहा था कि वे अपने आरोप के साथ सीबीआई से संपर्क करें कि उन्हें अधिकारियों ने धमकाया था. सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर को करूर भगदड़ की सीबीआई जांच का आदेश दिया था, जो 27 सितंबर को एक्टर-पॉलिटिशियन विजय की तमिलगा वेत्री कझगम की रैली के दौरान हुई थी. कोर्ट ने कहा था कि इस घटना ने देश की सोच को झकझोर दिया है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
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