मुंबई 13 Dec, (Rns): ज्येष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लेकर दी गई चेतावनी के महज 24 घंटे के भीतर राज्य सरकार हरकत में आ गई है। गुरुवार को अन्ना हजारे ने अल्टीमेटम दिया था कि यदि राज्य में लोकायुक्त कानून लागू नहीं किया गया तो वे जनवरी 2026 से आमरण अनशन शुरू करेंगे। इस चेतावनी के अगले ही दिन शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा में लोकायुक्त कानून, 2023 में एक बेहद महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दे दी गई। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों को भी लोकायुक्त कानून के दायरे में शामिल कर लिया गया है, जिससे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं इस संशोधन प्रस्ताव को पटल पर रखा, जिसे सदन ने अपनी स्वीकृति दे दी। इस मौके पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संशोधन का उद्देश्य कानून में स्पष्टता लाना है ताकि यह तय हो सके कि कौन-कौन से लोक सेवक जांच के दायरे में आएंगे। नए नियमों के मुताबिक, अब राज्य के किसी भी बोर्ड, निगम, समिति या अन्य सरकारी संस्थाओं में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किए गए आईएएस अधिकारी लोकायुक्त के प्रति जवाबदेह होंगे। सरकार का तर्क है कि इससे केंद्र और राज्य सरकार के कानूनों के बीच किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति पैदा नहीं होगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को एक मजबूत कानूनी आधार मिलेगा।
गौरतलब है कि अन्ना हजारे के आंदोलनों का इतिहास सरकारों को हिलाने वाला रहा है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में उनके नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने देशव्यापी रूप ले लिया था, जिसके परिणामस्वरूप न केवल जनलोकपाल की मांग उठी थी, बल्कि इसी आंदोलन की कोख से निकली आम आदमी पार्टी आज दिल्ली और पंजाब की सत्ता पर काबिज है। अन्ना के इसी प्रभाव और जनवरी 2026 के अनशन की चेतावनी को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने यह त्वरित कदम उठाया है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और अन्ना की मांगों के प्रति संवेदनशील है।
हालांकि, विधानसभा में आईएएस अधिकारियों को कानून के दायरे में लाने का फैसला तो हो गया है, लेकिन अन्ना हजारे का मूल सवाल अब भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है। अन्ना की मुख्य नाराजगी और शिकायत इस बात को लेकर है कि लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 के प्रावधानों के तहत महाराष्ट्र में लोकायुक्त की व्यवस्था को जमीनी स्तर पर कब लागू किया जाएगा, इसकी तारीख अभी स्पष्ट नहीं है। संशोधन से कानून का ढांचा तो मजबूत हुआ है, लेकिन इसके पूर्ण क्रियान्वयन को लेकर अब भी संशय बना हुआ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के इस कदम से अन्ना हजारे संतुष्ट होते हैं या वे अपने प्रस्तावित आंदोलन पर अडिग रहते हैं।

