नई दिल्ली 13 Dec, (Rns): देश की विमानन व्यवस्था में मची भारी उथल-पुथल के बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए अपने चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टरों (FOI) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ये अधिकारी एयरलाइनों की सुरक्षा, पायलट प्रशिक्षण और परिचालन संबंधी नियमों के अनुपालन की निगरानी जैसी बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते थे। नियामक संस्था द्वारा यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब इंडिगो एयरलाइंस भीषण संकट से जूझ रही है और इसके सीईओ पीटर एल्बर्स के आज डीजीसीए के समक्ष पेश होने की संभावना है।
इंडिगो एयरलाइंस में पिछले कुछ दिनों से जारी संकट ने विकराल रूप ले लिया है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को देश भर में इंडिगो की 1,600 से अधिक उड़ानें रद्द हुई थीं, जो भारतीय विमानन इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान माना जा रहा है। इस भारी अव्यवस्था का मुख्य कारण ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन्स’ (FDTL) के फेज-2 को लागू करने में एयरलाइन की विफलता और क्रू रोस्टर व स्टाफ प्रबंधन में घोर कुप्रबंधन बताया जा रहा है। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि इस स्थिति के लिए पूरी तरह से एयरलाइन की खराब योजना और प्रबंधन जिम्मेदार है।
यात्रियों को हो रही भारी असुविधा को देखते हुए सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ जहां रद्द उड़ानों के लिए समय पर रिफंड सुनिश्चित करने की सख्त समयसीमा तय की गई है, वहीं दूसरी तरफ अन्य एयरलाइनों को टिकट की कीमतें नियंत्रित रखने का निर्देश दिया गया है ताकि मजबूरी का फायदा न उठाया जा सके। इसके अलावा, दबाव कम करने के लिए इंडिगो को अपनी दैनिक उड़ानों में 10% की कटौती करने का निर्देश दिया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस कटौती के बाद अब इंडिगो लगभग 1,950 उड़ानें संचालित करेगा, जिनमें करीब 3 लाख यात्री सफर करेंगे, जबकि सामान्यत: सर्दियों में एयरलाइन प्रतिदिन करीब 2,300 उड़ानें संचालित करती है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गुरुवार को डीजीसीए ने अपने अधिकारियों को सीधे इंडिगो के मुख्यालय में तैनात कर दिया ताकि वे स्थिति की लाइव निगरानी कर सकें। उसी दिन दिल्ली और बेंगलुरु हवाईअड्डों पर 200 से अधिक उड़ानें रद्द होने की खबरें थीं। इस बीच, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद में जानकारी दी कि 1 दिसंबर को हुई बैठक में इंडिगो ने किसी भी संभावित समस्या का संकेत तक नहीं दिया था, जिससे यह संकट और भी गहरा और चौंकाने वाला बन गया है।

