नई दिल्ली 14 Dec, (Rns)- नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) के तृतीय दीक्षांत समारोह का आज भव्य आयोजन किया गया। द्वारका स्थित यशोभूमि में आयोजित इस कार्यक्रम में उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने भागीदारी की। इन विशेष अतिथियों का कहना था कि यह दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि उस भविष्य का उत्सव है, जिसे आज के युवा इंजीनियर अपने ज्ञान, नवाचार और मूल्यों से आकार देने जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इंजीनियरिंग, नवाचार, ग्रीन टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में देश और दिल्ली की समस्याओं के समाधान के लिए आगे आएं।
इस भव्य आयोजन में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद, गूगल एशिया पैसिफिक के अध्यक्ष श्री संजय गुप्ता, विश्वविद्यालय के कुलपति, शिक्षकगण, अधिकारी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। इस अवसर पर एनएसयूटी के ईस्ट और वेस्ट कैंपस में स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का रिमोट माध्यम से अनावरण और ईस्ट कैंपस में स्किल सेंटर तथा वेस्ट कैंपस में सेंटर फॉर इंडस्ट्री 4.0 का भी उद्घाटन किया गया, जो विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों, नवाचार और उद्योग-उन्मुख कौशल से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गई। उपराज्यपाल श्री वीके सक्सेना ने दीक्षांत समारोह के विषय ‘सतत एवं समावेशी विकास के लिए इंजीनियरिंग शिक्षा’ पर सभी विकासात्मक एवं प्रगतिशील प्रयासों में पारिस्थितिक संतुलन तथा पर्यावरणीय स्थिरता के सर्वोच्च महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज इंजीनियरिंग का अर्थ केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि सतत विकास, समावेशिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ समाधान प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि एनएसयूटी ने स्वयं को एक ऐसे संस्थान के रूप में स्थापित किया है, जो विद्यार्थियों को केवल प्रोफेशनल सफलता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन के लिए भी तैयार करता है।
श्री वीके सक्सेना ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक ऊष्मीकरण, कार्बन उत्सर्जन एवं मरुस्थलीकरण के विरुद्ध प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा यूएन-कॉप लक्ष्यों के प्रति प्रदर्शित प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए युवा स्नातकों से आह्वान किया कि वे अपने पेशेवर भविष्य को इन लक्ष्यों के अनुरूप व्यवस्थित करें, ताकि देश और विश्व का विकास सतत, संतुलित एवं न्यायसंगत रूप से सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक होती है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इंजीनियरिंग को केवल नवाचार या निर्माण तक सीमित न रखकर इसे समाज की सेवा का एक सशक्त माध्यम बनाएं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि एनएसयूटी जैसे संस्थान तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के माध्यम से भारत के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएसयूटी निरंतर शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है और विद्यार्थियों को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने ईस्ट और वेस्ट कैंपस में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के अनावरण को गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि नेताजी का जीवन आज भी देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के 78 वर्षों के बाद देश को किस दिशा में आगे बढ़ाना है, इसका सबसे महत्वपूर्ण निर्णय आज के युवाओं के हाथों में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी ऐतिहासिक पहल शुरू की गईं, जिनसे देश में नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज भारत शिक्षा, तकनीक, उद्योग और सामाजिक परिवर्तन सहित हर क्षेत्र में व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और इस परिवर्तन की असली शक्ति देश के युवा हैं, जो आने वाले भारत की दिशा और पहचान तय करेंगे।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इंजीनियरिंग, नवाचार, ग्रीन टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में देश और दिल्ली की समस्याओं के समाधान के लिए आगे आएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिग्री जीवन की मंज़िल नहीं, बल्कि एक पड़ाव है और हमारी शिक्षा व ज्ञान हर क्षेत्र में हमारा मार्गदर्शन करता है। उन्होंने युवाओं से आत्मविश्वास बनाए रखने, हार न मानने और देश, समाज व परिवार का नाम रोशन करने का संदेश दिया।
इस अवसर पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने एनएसयूटी के तृतीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी और कहा कि वे ऐसे दौर में स्नातक बनकर निकल रहे हैं, जब भारत ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल नारा नहीं, बल्कि युवाओं को देश में अवसर देने और उनसे नवाचार व समाधान की अपेक्षा का स्पष्ट संकल्प है। श्री सूद ने भारत के तेज़ी से बढ़ते स्टार्ट-अप इकोसिस्टम, वैश्विक सहयोग, नवाचार और इज ऑफ डूइंग बिज़नेस का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया भारत के साथ काम करना चाहती है। उन्होंने विद्यार्थियों से साहस, निर्णायकता और जिम्मेदारी अपनाने का आह्वान किया। श्री सूद ने कहा कि सफलता केवल डिग्री या अंकों से नहीं, बल्कि उद्देश्य, मूल्य-बोध, लक्ष्य और जोखिम उठाने के साहस से मिलती है। उन्होंने गुणवत्ता, विस्तार-क्षमता, विश्वसनीयता और अनुकूलन-क्षमता के मंत्रों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को ‘ब्रांड इंडिया’ के सबसे बड़े एंबेसडर बनने के निरंतर प्रयास करना हैं।

