नईदिल्ली ,14 दिसंबर (आरएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महाराष्ट्र में साल 2012 में 2 वर्षीय मासूम बच्ची का अपहरण कर बलात्कार और हत्या करने के दोषी रवि अशोक घुमारे की दया याचिका खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू ने यह सख्त निर्णय 6 नवंबर, 2025 को लिया था। बता दें कि 25 जुलाई, 2022 को पदभार संभालने के बाद से राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा खारिज की गई यह तीसरी दया याचिका है। अब घुमारे को सजा मिलना तय है।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर, 2019 को घुमारे की मौत की सजा को बरकरार रखा था। जस्टिस सूर्यकांत समेत 3 जजों की पीठ ने पाया कि घुमारे का अपनी कामुक इच्छाओं पर कोई नियंत्रण नहीं था और उसने अपनी यौन भूख मिटाने के लिए सभी प्राकृतिक, सामाजिक और कानूनी सीमाओं को पार कर दिया था। कोर्ट कहा था कि उसने एक खिलते हुए जीवन को बेरहमी से खत्म कर दिया और 2 साल की बच्ची के साथ अप्राकृतिक अपराध किया।
अभियोजन पक्ष ने बताया था कि जघन्य अपराधी श्रेणी में आने वाली यह घटना 6 मार्च, 2012 को महाराष्ट्र के जालना शहर के इंदिरा नगर में घटी थी। घुमारे ने पीडि़ता को चॉकलेट का लालच दिया था। निचली अदालत ने 16 सितंबर, 2015 को उसे दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई थी। घुमारे ने फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन जनवरी 2016 में हाई कोर्ट ने भी निचजी अदालत के फैसले को बरकरार रखा था।
राष्ट्रपति मुर्मू का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार लिया गया था, जो राष्ट्रपति को अपराधों, विशेष रूप से मृत्यु दंड या कोर्ट-मार्शल मामलों में क्षमादान, सजा में छूट, राहत, माफी या सजा कम करने का अधिकार देता है, जिससे कठोर न्याय से राहत मिलती है। यह शक्ति आमतौर पर मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर प्रयोग की जाती है और मनमानी के लिए सीमित न्यायिक समीक्षा के अधीन है। यह राष्ट्रपति के विकेट पर भी आधारित होती है।
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