रियाद/बीजिंग ,15 दिसंबर । चीन और सऊदी अरब के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते लगातार गहरे होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी रियाद पहुंचे, जहां उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के निमंत्रण पर एक अहम द्विपक्षीय बैठक की। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद दोनों देशों ने एक सुर में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आपसी संवाद और समन्वय को और अधिक मजबूत करने का ऐलान किया है। इस दौरान दोनों मुल्कों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता भी हुआ, जिसके तहत राजनयिक और विशेष पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा की अनिवार्यता को खत्म करने (वीजा छूट) पर सहमति बनी है।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आर्थिक, व्यापार और निवेश के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों के मौजूदा स्तर की जमकर सराहना की। संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों देशों ने ऊर्जा और निवेश के पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा नई ऊर्जा और ‘हरित परिवर्तनÓ (त्रह्म्द्गद्गठ्ठ ञ्जह्म्ड्डठ्ठह्यद्बह्लद्बशठ्ठ) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। अपनी इस यात्रा के दौरान चीनी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से भी मुलाकात की। सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, वांग यी ने स्पष्ट किया कि चीन ने हमेशा सऊदी अरब को मध्य पूर्व की कूटनीति में प्राथमिकता और वैश्विक स्तर पर एक अहम साझेदार के रूप में देखा है।
कूटनीतिक मोर्चे पर चीन ने एक बार फिर मध्य पूर्व में अपनी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया। वांग यी ने सऊदी अरब और ईरान के बीच सुधरते रिश्तों और उनके विकास के लिए चीन का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। सोमवार को जारी बयान में कहा गया कि चीन क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हासिल करने में सऊदी अरब की भूमिका और प्रयासों की सराहना करता है। इसके अलावा, दोनों देशों ने फिलिस्तीन मुद्दे पर भी चर्चा की और फिलिस्तीनियों के लिए एक स्वतंत्र राज्य के गठन के अपने समर्थन को दोहराया।
गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी मध्य पूर्व के तीन देशों के दौरे पर हैं। संयुक्त अरब अमीरात से शुरू हुई उनकी यह यात्रा सऊदी अरब के बाद अब जॉर्डन में समाप्त होने की उम्मीद है। चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ की ओर से जारी संयुक्त बयान में यद्यपि यह विस्तार से स्पष्ट नहीं किया गया कि किन विशिष्ट मुद्दों पर समन्वय बढ़ाया जाएगा, लेकिन वीजा छूट और ईरान-फिलिस्तीन जैसे मुद्दों पर साझा सहमति दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक गठजोड़ की ओर इशारा करती है।
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