चंद्रपुर ,17 दिसंबर । महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से इंसानियत को शर्मसार और सिस्टम को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहां अवैध साहूकारी के मकडज़ाल में फंसे एक किसान को अपना कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी तक बेचनी पड़ गई। रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह है कि किसान ने महज 1 लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसे साहूकारों ने ब्याज और पेनल्टी जोड़कर 74 लाख रुपये बना दिया। इतना ही नहीं, कर्ज वसूली के लिए साहूकारों ने किसान का घर, जमीन और ट्रैक्टर तक बिकवा दिया। पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
घटना नागभीड़ तहसील के मिंथुर गांव की है। पीडि़त किसान रोशन सदाशिव कुडे ने पुलिस को बताया कि उसने साल 2021 में दूध का व्यवसाय शुरू करने के लिए चार स्थानीय साहूकारों से 40 प्रतिशत की भारी-भरकम ब्याज दर पर 1 लाख रुपये उधार लिए थे। इन पैसों से उसने 15 से 20 गायें खरीदी थीं, लेकिन दुर्भाग्यवश लंपी वायरस की चपेट में आने से गायों की मौत हो गई और उसे भारी नुकसान हुआ। इसके बाद साहूकारों ने तकादा शुरू कर दिया। एक साहूकार का पैसा चुकाने के लिए रोशन ने दूसरे से कर्ज लिया और देखते ही देखते वह 6 साहूकारों के चंगुल में फंस गया। उस पर हर दिन 5 से 6 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई जाने लगी।
किसान का दावा है कि साहूकारों का मुंह फाड़ता कर्ज चुकाने के लिए उसने अपनी चार एकड़ जमीन, अपना पुश्तैनी घर, ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन तक बेच दिया। वह अब तक करीब 50 लाख से ज्यादा की नकद राशि और कुल मिलाकर 74 लाख रुपये की संपत्ति और नकदी गंवा चुका है, लेकिन साहूकारों की उधारी खत्म नहीं हुई। जब किसान के पास देने के लिए कुछ नहीं बचा, तो एक साहूकार ने उसे किडनी बेचने का खौफनाक सुझाव दिया। मजबूरी में किसान तैयार हो गया। इसके बाद एक एजेंट के जरिए उसे पहले मेडिकल जांच के लिए कोलकाता और फिर सर्जरी के लिए कंबोडिया भेजा गया। वहां 8 लाख रुपये में उसकी किडनी बेची गई। हैवानियत की हद यह रही कि विदेश से लौटने पर साहूकारों ने वह 8 लाख रुपये भी उससे छीन लिए।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद चंद्रपुर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ब्रह्मपुरी पुलिस थाने में 6 आरोपियों के खिलाफ जबरन वसूली और महाराष्ट्र साहूकारी (विनियमन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अवैध साहूकारी का एक वीभत्स रूप है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि गिरोह में शामिल अन्य लोगों और एजेंटों तक पहुंचा जा सके।
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