न्यूयॉर्क ,17 दिसंबर । वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दम भरने वाले अमेरिका का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आया है। क्वाड (क्तह्वड्डस्र) समूह को लेकर अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक दस्तावेज ने भारत की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए ट्रंप सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दस्तावेज में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, तकनीक और मानवीय सहायता जैसे मुद्दों पर तो लंबा-चौड़ा बखान किया गया है, लेकिन ‘आतंकवादÓ जैसे गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साध ली गई है। यह दस्तावेज ऐसे समय में आया है जब भारत ने इस साल पहलगाम और लाल किले के पास भीषण आतंकी हमले झेले हैं, और यहां तक कि क्वाड सदस्य ऑस्ट्रेलिया भी बोंडी बीच पर दहशतगर्दी का शिकार हुआ है।
अमेरिका का यह रुख इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि इसी महीने 4 और 5 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में हुई क्वाड काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक में अमेरिका के सुर बिल्कुल अलग थे। उस बैठक में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने एक सुर में सीमा पार आतंकवाद की निंदा की थी और 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए आतंकी हमले के दोषियों को सजा दिलाने का संकल्प लिया था। लेकिन जब आधिकारिक दस्तावेज जारी करने की बारी आई, तो अमेरिका ने बड़ी चालाकी से आतंकवाद के मुद्दे से किनारा कर लिया। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि मंच पर साथ देने और दस्तावेजों में मुद्दा गायब करने की यह अमेरिकी नीति उसके दोगलेपन को उजागर करती है।
इस साल भारत आतंकवाद के गहरे जख्मों से गुजरा है। 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की धर्म पूछकर हत्या कर दी थी। जुलाई में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस घटना की निंदा की थी। उस वक्त भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कर दिया था कि भारत अपनी जनता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा, जिसके बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूरÓ को अंजाम दिया था। उस समय लगा था कि अमेरिका भारत के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है, लेकिन नए दस्तावेज ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका की कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है।
ताजा घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि इंडो-पैसिफिक को आतंकवाद मुक्त बनाने के जो वादे बैठकों में किए जाते हैं, वे अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकता सूची में उस गंभीरता से शामिल नहीं हैं। क्वाड के संयुक्त बयानों में जिस तरह से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद (बिना नाम लिए) और पहलगाम हमले का जिक्र किया गया था, उसका इस नए दस्तावेज से नदारद होना भारत के लिए चिंता का विषय है। ट्रंप प्रशासन का यह रवैया न केवल क्वाड की मूल भावना के विपरीत है, बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को कमजोर करने वाला भी है।
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