ढाका ,20 दिसंबर । बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा की आग अब मीडिया प्रतिष्ठानों तक पहुंच गई है। बीती रात दंगाइयों ने राजधानी ढाका में तांडव मचाते हुए देश के प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार ‘द डेली स्टारÓ और बांग्ला अखबार ‘प्रथम आलोÓ के दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया। कारवान बाजार स्थित इन दफ्तरों में भीड़ ने पहले जमकर तोडफ़ोड़ की और फिर आगजनी को अंजाम दिया। इस खौफनाक मंजर के दौरान ‘द डेली स्टारÓ की जलती हुई इमारत की छत पर करीब 28 पत्रकार तीन घंटे तक फंसे रहे, जिन्होंने उस रात मौत को बेहद करीब से महसूस किया। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि ‘द डेली स्टारÓ का न्यूज़रूम पूरी तरह जलकर खाक हो गया है और प्रबंधन ने फिलहाल अखबार के प्रिंट और ऑनलाइन प्रकाशन को बंद करने का फैसला लिया है।
‘बीडीन्यूज24Ó की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूज़रूम में काम कर रहे स्टाफ को एक फोन कॉल के जरिए भीड़ के आने की चेतावनी मिली थी। घबराए स्टाफ ने शुरू में नीचे भागने की कोशिश की, लेकिन तब तक उपद्रवी निचली मंजिलों पर कब्जा जमा चुके थे और वहां आग लगा दी थी। इमारत में धुएं का गुबार भरने के कारण पत्रकारों का समूह जान बचाने के लिए 9वीं मंजिल की छत पर जा छिपा। डर का आलम यह था कि जब एक कैंटीन वर्कर ने फायर-एग्जिट सीढ़ी से नीचे उतरने की कोशिश की, तो नीचे खड़ी उन्मादी भीड़ ने उसे पकड़कर बेरहमी से पीटा। इस घटना के बाद छत पर मौजूद किसी भी पत्रकार ने नीचे उतरने की हिम्मत नहीं जुटाई।
हालात उस वक्त और भी भयावह हो गए जब फायर सर्विस के कर्मचारी आग बुझाने और फंसे लोगों को निकालने पहुंचे, लेकिन नीचे जारी तोडफ़ोड़ और लूटपाट के कारण पत्रकार नीचे आने को तैयार नहीं थे। छत पर सन्नाटा और खौफ तब चीख में बदल गया जब कई हमलावर छत तक आ पहुंचे और दरवाजा पीटने लगे। अपनी जान बचाने के लिए पत्रकारों ने छत पर रखे गमलों से दरवाजे को ब्लॉक करने की कोशिश की। इस बीच, एडिटर्स काउंसिल के प्रेसिडेंट नूरुल कबीर और फोटोग्राफर शाहिदुल आलम ने भीड़ को समझाने की कोशिश की, लेकिन उपद्रवियों ने उनके साथ भी बदसलूकी की।
काफी जद्दोजहद के बाद वहां मौजूद सैनिकों ने सीढिय़ों के एक तरफ से रास्ता बनाया, जिसके बाद फायर-एग्जिट और इमारत के पिछले रास्ते से पत्रकारों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। हालांकि, उसी दौरान हमलावर दूसरे रास्ते से लूटपाट जारी रखे हुए थे। मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर आए एक पत्रकार ने कहा कि वे खुशकिस्मत थे जो इतनी बड़ी आपदा से बच गए, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनका देश अब किस दिशा में जा रहा है।
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