शिमला ,29 दिसंबर (आरएनएस)। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जहूर एच जैदी को सुनायी गयी उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी। यह मामला कुख्यात गुडिय़ा बलात्कार और हत्या मामले की जांच के दौरान एक आरोपी की हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है।
अदालत ने दोषसिद्धि के खिलाफ जैदी की अपील पर निलंबन का यह आदेश दिया है, हालांकि विस्तृत आदेश की अभी प्रतीक्षा है। इससे पहले, 18 जनवरी को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने जैदी और आठ अन्य पुलिस अधिकारियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या सहित अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया था। जैदी के साथ ठियोग के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक, उप निरीक्षक राजिंदर सिंह, सहायक उप निरीक्षक दीप चंद शर्मा, मानद मुख्य आरक्षी मोहन लाल और सूरत सिंह, मुख्य आरक्षी रफी मोहम्मद और आरक्षी रंजीत को 21 जनवरी को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी थी।
यह मामला जुलाई 2017 में कोटखाई क्षेत्र में एक 16 वर्षीय लड़की ( बदला हुआ नाम गुडिय़ा) के बलात्कार और हत्या से का था। जांच के दौरान पुलिस ने दो संदिग्धों राजू और सूरज को हिरासत में लिया था। सूरज की पुलिस हिरासत में मौत हो गयी थी। बाद में चिकित्सा साक्ष्यों से उसके शरीर पर 20 से अधिक चोट के निशान मिले थे और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिकल बोर्ड ने हिरासत में प्रताडऩा की पुष्टि की थी।
सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों और कोटखाई थाने को जलाने की कोशिश सहित हुई हिंसा के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) को सौंप दी थी। सीबीआई ने वरिष्ठ अधिकारियों सहित नौ पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया था। उल्लेखनीय है कि गुडिय़ा बलात्कार-हत्या मामले में शिमला की एक विशेष अदालत ने जून 2021 में मुख्य आरोपी अनिल कुमार उर्फ नीलू को आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी।
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