0-कहा- हम हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के इच्छुक
नईदिल्ली,29 दिसंबर (आरएनएस)। उन्नाव रेप केस में सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से जमानत देने और सजा निलंबित किए जाने खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्रीय जांच ब्यूरों (सीबीआई) ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सेंगर की जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट कहा कि सेंगर को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाश पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, हम पाते हैं कि कानून के महत्वपूर्ण सवाल हैं, जिन पर विचार करने की जरूरत है। इस पर 14 दिन की नोटिस जारी की जाए। इसी तरह जवाब आने तक सेंगर की जमानत पर रोक लगाई जाती है। अपराध की प्रकृति के आधार पर जमानत मिलने के बाद भी सेंगर जेल से बाहर नहीं आ सकता है।
सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज है। सेंगर की जमानत आगे चलकर अन्य मामलों में नजीर बन सकती है। उन्होंने कहा कि पीडि़ता की उम्र 16 वर्ष से कम थी। ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को निर्विवाद रूप से आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया है, जिसमें न्यूनतम 20 वर्ष की सजा है। ऐसे में आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
एसजी मेहता की दलीलों पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, फिलहाल हम हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के इच्छुक हैं। आमतौर पर नियम यह है कि अगर व्यक्ति जेल से बाहर है तो कोर्ट उसकी आजादी नहीं छीनता, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग है क्योंकि सेंगर दूसरे केस (पीडि़ता के पिता की हत्या) में अभी भी जेल में है। सीजेआई ने कहा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता से समझौते का कोई सवाल ही नहीं उठता। सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे।
पीडि़त पक्ष के वकील हेमंत कुमार मौर्या ने कहा, मैं सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करना चाहता हूं। पीडि़त परिवार को लगा था कि आरोपी रिहा हो गया, तो उसकी गैंग उसके परिवार के बाकी सदस्यों को मार देगी। मैं पीडि़त के चाचा का वकील हूं। उनके चाचा को आर्थिक रूप से बर्बाद करने का दबाव चल रहा है। उनके परिवार के एक नाबालिग सदस्य को स्कूल से निकाल दिया है और अब उसे किसी स्कूल में प्रवेश नहीं मिल रहा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर को सशर्त जमानत दी थी। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने सेंगर की सजा को भी उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। कोर्ट ने सेंगर को पीडि़ता के 5 किलोमीटर के दायरे में न जाने और जमानत अवधि में दिल्ली में ही रहने के आदेश दिए थे। इसी तरह शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द करने की चेतावनी दी थी।
हाई कोर्ट ने माना था कि सेंगर के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(सी) के तहत अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि सेंगर को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)( बी) के लिए लोक सेवक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने ये भी कहा कि पीडि़ता की जान को खतरा होने को देखते हुए कोर्ट किसी व्यक्ति को इस वजह से हिरासत में नहीं रख सकते कि पुलिस या अर्धसैनिक बल अपना काम ठीक से नहीं करेंगे।
उन्नाव में एक नाबालिग लड़की को 11-20 जून, 2017 के बीच सेंगर द्वारा अगवा कर बलात्कार किया गया था। उसके बाद उसे 60,000 रुपये में बेच दिया गया, जिसके बाद उसे माखी पुलिस स्टेशन से बरामद किया गया। पीडि़ता को सेंगर के निर्देश पर पुलिस अधिकारियों द्वारा धमकाया गया और चेतावनी दी गई कि वह इस बारे में कुछ न बोले। बाद में उसके खिलाफ पॉक्सो के तहत एफआईआर हुई और इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर गिरफ्तार किया गया।
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