इस्लामाबाद ,02 जनवरी । केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो (स्ह्लड्डद्दद्ग-ढ्ढढ्ढ) जलविद्युत परियोजना को भारत सरकार की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट एक बार फिर सामने आई है। पाकिस्तान ने इसे 1960 की सिंधु जल संधि (ढ्ढङ्खञ्ज) का उल्लंघन बताया है और भारत पर मनमानी का आरोप लगाया है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की यह आपत्ति अब बेमानी है, क्योंकि भारत ने आतंकी हमलों के जवाब में पिछले साल ही इस संधि को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से भारत अपनी जल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फैसले ले रहा है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि भारत ने इस परियोजना के बारे में उन्हें कोई पूर्व सूचना या अधिसूचना नहीं दी। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों की स्पष्ट अवहेलना करार दिया है। अंद्राबी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए उन्हें पता चला कि भारत चिनाब नदी पर दुलहस्ती स्टेज-ढ्ढढ्ढ का निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि संधि के तहत भारत पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) पर एकतरफा निर्माण नहीं कर सकता और उसे किसी भी नई परियोजना की तकनीकी जानकारी साझा करनी चाहिए। पाकिस्तानी सिंधु जल आयुक्त ने अब भारतीय समकक्ष से इस प्रोजेक्ट की प्रकृति और तकनीकी विवरणों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
पाकिस्तान भले ही संधि की दुहाई दे रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि भारत अब बदली हुई रणनीति पर काम कर रहा है। पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप ‘द रेजिस्टेंस फ्रंटÓ (ञ्जक्रस्न) ने ली थी। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि आतंक और बातचीत या संधियां एक साथ नहीं चल सकतीं। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई 1960 की यह संधि दशकों से दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती रही है, लेकिन अब भारत अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है।
परियोजना की बात करें तो भारत के पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति ने दिसंबर 2025 में किश्तवाड़ जिले में बनने वाली इस ‘रन-ऑफ-द-रिवरÓ परियोजना को मंजूरी दी थी। यह मौजूदा 390 मेगावाट दुलहस्ती स्टेज-ढ्ढ परियोजना का ही विस्तार है। समिति ने नोट किया था कि परियोजना के पैरामीटर संधि के अनुरूप हैं, लेकिन संधि के निलंबन के कारण भारत अब पाकिस्तान की आपत्तियों की परवाह किए बिना सिंधु बेसिन में सावलकोट, रतले, बुरसर और पाकल दुल जैसी कई रुकी हुई परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
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