तेहरान ,04 जनवरी । ईरान में बिगड़ती आर्थिक स्थिति और मुद्रा रियाल के लगातार कमजोर होने से उपजे विरोध-प्रदर्शन अब हिंसक मोड़ पर पहुंच गए हैं। बीते एक हफ्ते से जारी अशांति के बीच देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सुरक्षा बलों को निर्देश दिया है कि वे हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्ती बरतें, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से संवाद बनाए रखें।
सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में 86 वर्षीय खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शन और दंगों के बीच फर्क करना जरूरी है। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बात सुनी जानी चाहिए, लेकिन हिंसा फैलाने वालों के साथ किसी तरह की नरमी उचित नहीं है। उन्होंने मौजूदा हालात के लिए अमेरिका और इजराइल जैसी विदेशी शक्तियों को जिम्मेदार ठहराया और रियाल की गिरावट को भी दुश्मनों की साजिश बताया।
देश के 31 में से 22 प्रांतों में विरोध-प्रदर्शन फैल चुके हैं। शनिवार रात हुई झड़पों में दो और लोगों की मौत हो गई, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। कोम शहर में एक ग्रेनेड विस्फोट में एक व्यक्ति की जान गई। सरकारी मीडिया के अनुसार, वह व्यक्ति कथित तौर पर लोगों पर हमला करने की मंशा से ग्रेनेड ले जा रहा था। इसके अलावा, हरसिन शहर में रिवोल्यूशनरी गार्ड की बासिज इकाई का एक सदस्य गोली और चाकू के हमले में मारा गया।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनाव बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया गया तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। इसके बाद ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की घोषणा ने ईरानी नेतृत्व की चिंता और बढ़ा दी है। जवाब में ईरान के अधिकारियों ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि देशभर में 100 से अधिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालांकि यह आंदोलन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों जितना व्यापक नहीं है, लेकिन गहराती आर्थिक संकट और रियाल की ऐतिहासिक गिरावट ने आम लोगों के आक्रोश को साफ तौर पर सामने ला दिया है।
00
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

