0-युवतियों एवं महिला पत्रकारों को राज्य सरकार दे सुरक्षा
रायपुर, 05 जनवरी (आरएनएस)। कामकाजी युवतियों एवं महिलाओं के साथ देश एवं प्रदेश में इन दिनों बहुत अपमानजनक घटनाएं हो रही है। निजी क्षेत्र हो या सरकारी क्षेत्र हर जगह पुरूषों के बराबर लगातार कार्य करने के बावजूद भी उन्हें अपने संस्थान के मुख्यिाओं से अथवा सहयोगियों से प्राय: हर रोज अपमानित होना पड़ रहा है।
केन्द्र सरकार एवं प्रदेश की राज्य सरकारें यूं तो महिला सशक्तीकरण पर आए दिन लंबे चौड़े कार्यक्रमों का आयोजन करती है, किन्तु यथार्थ पर स्थिति बेहद खराब है, उक्त टिप्पणी हॉल में छत्तीसगढ़ के तमनार में महिला कॉस्टेबल के साथ हुई अपमानजनक घटना एवं रायपुर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल के जमानत मामले में कव्हरेज के लिए गई महिला पत्रकार के साथ हुई अपमानजनक घटना पर करते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा के पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश मैत्रेयी माथुर ने संवाददाता से अल्प मुलाकात में रविवार को चर्चा के दौरान कहा कि एक तरफ हम नवरात्र में 9 दिन 9 देवियों की उपासना करते हैं, वहीं उनके स्वरूपों का रोज अपमान होना मानवता को शर्म-सार करने वाला है। पूर्व न्यायाधीश माथुर ने महिला पत्रकारों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी यही स्थिति रही तो पत्रकारिता के क्षेत्र में युवतियों को आने से पहले 100 बार सोचना पड़ेगा।
मैत्रेयी माथुर ने सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई से केन्द्र सरकार के जरिए राज्य सरकारों को काम-काजी महिलाओं विशेषकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा से संबंधित अपराधों को संज्ञेय अपराध घोषित करते हुए उक्त मामलों को गैर जमानती मामलों में दर्ज करने की मांग की है। निजी कंपनियों द्वारा विशेषकर चिकित्सा संस्थानों में युवतियों को देर रात तक वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा काम लिए जाने के मामले में कैब व्यवस्था भी घर तक नहीं करने के मुद्दे को भी चिंतनीय बताया है।
एस. शर्मा
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