वॉशिंगटन ,05 जनवरी । वेनेजुएला और अमेरिका के बीच महीनों से चल रहे तनाव का अंत एक बड़े अमेरिकी सैन्य अभियान के साथ हुआ है। अमेरिकी सेना ने एक साहसिक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को राजधानी काराकास से गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें अमेरिका ले आई है। हालांकि, मादुरो ने अमेरिकी खतरे को देखते हुए देश में भारी सैन्य तैनाती की थी, लेकिन अमेरिकी सैनिक आसानी से राजधानी में दाखिल होने में सफल रहे। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद अब एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला की मदद के लिए तैनात क्यूबा के 32 अधिकारी भी मारे गए हैं।
क्यूबा की सरकार ने रविवार को आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान उनके 32 अधिकारियों की जान गई है। क्यूबा के सरकारी टीवी पर जारी बयान के मुताबिक, वेनेजुएला सरकार के अनुरोध पर एक विशेष मिशन के तहत क्यूबा के मिलिट्री और पुलिस अधिकारी वहां तैनात थे। गौरतलब है कि क्यूबा और वेनेजुएला लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे हैं और क्यूबा अक्सर सुरक्षा अभियानों में मदद के लिए अपने बल भेजता रहा है। इस घटना के बाद क्यूबा सरकार ने मारे गए अधिकारियों के सम्मान में दो दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है। सरकार ने अपने बयान में कहा कि उनके देशवासियों ने सुरक्षा और रक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए गरिमा और वीरता के साथ अमेरिकी हमलावरों का सामना किया और भीषण बमबारी व प्रतिरोध के दौरान वे शहीद हो गए।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को बेहद खतरनाक बताते हुए अपनी सेना की पीठ थपथपाई है। ट्रंप ने भी पुष्टि की कि ऑपरेशन में बड़ी संख्या में क्यूबा के लोग मारे गए हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष को कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। ट्रंप ने सोमवार को बताया कि यह एक बहुत जोखिम भरा मिशन था, जिसमें उनके कुछ सैनिक घायल जरूर हुए हैं और एक हेलीकॉप्टर को काफी नुकसान पहुंचा है, लेकिन सभी सैनिक सुरक्षित हैं और वे अपना सब कुछ वापस लाने में सफल रहे। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि दूसरी तरफ बहुत मौतें हुईं, लेकिन अमेरिका का कोई सैनिक नहीं मारा गया।
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