वॉशिंगटन ,06 जनवरी । वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को भले ही अमेरिका अपनी बड़ी कामयाबी मान रहा हो, लेकिन इस ऑपरेशन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेनÓ (रू्रत्र्र) अभियान की पोल खोलकर रख दी है। साल 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने जोर-शोर से ‘मागाÓ का नारा दिया था और वादा किया था कि अमेरिका अब दूसरे देशों में सैन्य कार्रवाई या ऑपरेशन पर अपने करदाताओं का एक भी रुपया बर्बाद नहीं करेगा। लेकिन ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मादुरो को पकडऩे के लिए पिछले एक साल में अमेरिका ने अरबों रुपये पानी की तरह बहा दिए हैं।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला में निकोलस मादुरो के खिलाफ इस सीक्रेट सीआईए ऑपरेशन की कमान विदेश मंत्री मार्को रुबियो संभाल रहे थे। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि अगर यह अभियान विफल होता, तो विफलता का पूरा ठीकरा रुबियो के सिर ही फोड़ा जाता। मादुरो को ‘न्यूट्रलाइजÓ करने के लिए अमेरिका ने सितंबर 2025 में ‘ऑपरेशन साउदर्न स्पीयरÓ की शुरुआत की थी। डिफेंस वन मैगजीन के आंकड़ों के अनुसार, इस मिशन में एक युद्धपोत, एक परमाणु पनडुब्बी और जेराल्ड फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती की गई थी, जिनकी कुल कीमत 40 अरब डॉलर आंकी गई है।
आसमान से निगरानी और हमले के लिए 83 फाइटर जेट, 10 एफ-35 स्टील्थ जेट और 7 रीपर ड्रोन तैनात किए गए थे, जिनकी कीमत 3 अरब डॉलर है। रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह भी सामने आया है कि वेनेजुएला की घेराबंदी के लिए तैनात इन हथियारों और संसाधनों का ऑपरेशनल खर्च प्रति घंटे 333,000 डॉलर (करीब 3 करोड़ रुपये) आ रहा था। सितंबर से जनवरी तक चले इस मिशन में करीब 3700 घंटे लगे, जिससे खर्च का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा, मादुरो पर 50 मिलियन डॉलर (करीब 450 करोड़ रुपये) का इनाम रखा गया था, जो आतंकी ओसामा बिन लादेन पर रखे गए इनाम से भी दोगुना था। ऑपरेशन के बाद यह राशि और हेलिकॉप्टर पायलट को 2 मिलियन डॉलर का अलग से इनाम अमेरिकी सरकारी खजाने से ही दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सीआईए की भूमिका सबसे अहम रही। व्हाइट हाउस के आंकड़ों के मुताबिक, सीआईए को इस साल संचालित करने के लिए 101 बिलियन डॉलर (करीब 9 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया था। इसमें से 73 बिलियन डॉलर खुफिया जानकारी जुटाने और 28 बिलियन डॉलर सैन्य कार्रवाई के लिए थे। बताया जा रहा है कि इस बजट का एक बड़ा हिस्सा अकेले वेनेजुएला मिशन पर खर्च हो गया। इसे अमेरिका का सबसे महंगा सैन्य ऑपरेशन माना जा रहा है, जिसमें 150 हेलिकॉप्टर और 10 हजार सैनिकों ने हिस्सा लिया। अमेरिकी सैनिक इस हमले की योजना अगस्त 2025 से ही बना रहे थे।
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