ढाका ,20 जनवरी । भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में जमी बर्फ और गहराती नजर आ रही है। इसी बीच चीन के बांग्लादेश स्थित राजदूत याओ वेन ने सोमवार को तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र का दौरा किया, जो भारत के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेकÓ के काफी करीब स्थित है। यह करीब 22 किलोमीटर लंबी संकरी पट्टी है, जिसके जरिए भारत की मुख्य भूमि पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी हुई है।
यह दौरा तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट के तहत चल रही तकनीकी जांच से जुड़ा बताया जा रहा है। गौरतलब है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कुछ नेताओं द्वारा पिछले साल भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘लैंडलॉक्डÓ कहे जाने और चीन के आर्थिक विस्तार का समर्थन करने जैसे बयान दिए गए थे, जिन पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर चीन की जल्दबाजी
बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन ने चीनी राजदूत याओ वेन के साथ रंगपुर के तेफामधुपुर तालुक के शाहबाजपुर क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन तीस्ता मास्टर प्लान (टीएमपी) को जल्द से जल्द लागू करने के लिए उत्सुक है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल परियोजना पर काम शुरू नहीं किया जा सकता।
रिजवाना हसन ने स्थानीय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को बिना किसी तकनीकी चूक के पूरा करना चाहता है, क्योंकि बांग्लादेश के लोग इससे बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें नदी किनारे रहने वाले लोगों की आजीविका बचाने और बाढ़ व कटाव की समस्या से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत के लिए तीस्ता क्यों अहम
तीस्ता नदी बांग्लादेश के उत्तरी जिलों में कृषि और जीवनरेखा मानी जाती है। वहीं भारत के लिए, खासकर पश्चिम बंगाल के लिए, यह नदी समान रूप से महत्वपूर्ण है। दशकों से तीस्ता जल-बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों के चलते अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है।
प्रस्तावित परियोजना में बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग, मजबूत तटबंधों का निर्माण और कृषि योग्य भूमि की पुनर्बहाली शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की भागीदारी बांग्लादेश के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन भारत के लिए यह क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संवेदनशीलता को बढ़ा सकती है, खासकर इसलिए क्योंकि यह इलाका चिकन नेक के बेहद नजदीक है।
यूनुस सरकार के साथ चीन की बढ़ती नजदीकियां
रविवार को चीनी राजदूत याओ वेन ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलिलुर रहमान से मुलाकात की। इस बैठक के बाद यूनुस के प्रेस विंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्सÓ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा की और बांग्लादेश-चीन की पारंपरिक मित्रता एवं विकास सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
बैठक में तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट और प्रस्तावित बांग्लादेश-चीन फ्रेंडशिप हॉस्पिटल पर भी चर्चा हुई। याओ वेन ने तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा करने और तकनीकी जांच को जल्द पूरा करने के प्रति चीन की प्रतिबद्धता दोहराई।
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