नई दिल्ली ,25 जनवरी (आरएनएस)। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो को विमानन नियामक डीजीसीए (ष्ठत्रष्ट्र) की सख्ती के आगे झुकना पड़ा है। कोहरे और परिचालन में हुई भारी अव्यवस्था के बाद डीजीसीए द्वारा दिए गए आदेश का पालन करते हुए इंडिगो ने घरेलू हवाई अड्डों पर अपने 700 से ज्यादा ‘स्लॉटÓ छोड़ दिए हैं। यह कार्रवाई दिसंबर की शुरुआत में मचे उस हाहाकार का नतीजा है, जब कोहरे और अन्य कारणों से हजारों उड़ानें प्रभावित हुई थीं। 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की करीब 2,507 उड़ानें रद्द हुईं और 1,852 उड़ानें देरी से चली थीं, जिससे देश भर के तीन लाख से ज्यादा यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसी कुप्रबंधन को देखते हुए डीजीसीए ने एयरलाइन के विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत की कटौती का कड़ा आदेश सुनाया था।
मेट्रो शहरों के हवाई यातायात पर पड़ेगा बड़ा प्रभाव
इंडिगो द्वारा मंत्रालय को सौंपी गई 717 स्लॉट्स की लिस्ट से साफ है कि इसका सबसे ज्यादा असर देश के प्रमुख महानगरों पर पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार, सरेंडर किए गए कुल स्लॉट्स में से 364 स्लॉट दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे छह बड़े मेट्रो एयरपोर्ट्स के हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा कटौती हैदराबाद और बेंगलुरु की उड़ानों में देखने को मिल सकती है। ये स्लॉट जनवरी से मार्च तक की अवधि के लिए छोड़े गए हैं। स्थिति को संभालने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तुरंत अन्य एयरलाइनों से इन खाली स्लॉट्स के लिए आवेदन मांगे हैं, ताकि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो। हालांकि, मंत्रालय ने शर्त रखी है कि इन नए स्लॉट्स को लेने के लिए कोई भी एयरलाइन अपने मौजूदा रूट बंद नहीं करेगी।
दूसरी एयरलाइंस के लिए स्लॉट लेना आसान नहीं
भले ही सरकार ने अन्य कंपनियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं, लेकिन विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी एयरलाइंस इन स्लॉट्स को लेने में शायद ही ज्यादा दिलचस्पी दिखाएं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि किसी भी नए रूट की प्लानिंग और उसे शुरू करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसे इतनी कम नोटिस पर अंजाम देना मुश्किल है। साथ ही, खाली हुए अधिकतर स्लॉट ‘रेड-आईÓ फ्लाइट्स (देर रात या तड़के की उड़ानें) के हैं, जिन्हें यात्री आमतौर पर कम पसंद करते हैं और ये मुनाफे के लिहाज से कंपनियों के लिए बहुत आकर्षक नहीं होते।
जुर्माना और बैंक गारंटी के साथ डीजीसीए का कड़ा संदेश
डीजीसीए इस बार सिर्फ स्लॉट कटौती तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने एयरलाइन पर आर्थिक दंड भी लगाया है। नियामक ने 17 जनवरी को परिचालन में खामियों के चलते इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया था। इसके अलावा, एयरलाइन के सीईओ पीटर एलबर्स को चेतावनी जारी की गई और भविष्य में सुधार सुनिश्चित करने के लिए इंडिगो को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने का निर्देश भी दिया गया है। यह कार्रवाई विमानन क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखने के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखी जा रही है।
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