नई दिल्ली ,25 जनवरी (आरएनएस)। अगर आप जीमेल, फेसबुक, इंस्टाग्राम या नेटफ्लिक्स जैसी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। डिजिटल दुनिया में अब तक की बड़ी सेंधमारी सामने आई है, जिसमें करीब 14.9 करोड़ (149 मिलियन) यूनिक आईडी और पासवर्ड लीक हो गए हैं। चिंता की बात यह है कि करोड़ों यूजर्स का यह निजी डेटा इंटरनेट पर बिना किसी पासवर्ड या सुरक्षा के खुलेआम उपलब्ध था। वायर्ड (ङ्खढ्ढक्रश्वष्ठ) की रिपोर्ट के मुताबिक, जाने-माने सिक्योरिटी एनालिस्ट जेरेमिया फाउलर ने इस विशाल डेटाबेस का पता लगाया है, जिसमें दुनिया के लगभग हर बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ा डेटा शामिल है।
जीमेल से लेकर नेटफ्लिक्स तक, सब पर खतरा
फाउलर की रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। लीक हुए डेटा में सबसे बड़ी संख्या ईमेल अकाउंट्स की है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 4.8 करोड़ जीमेल अकाउंट्स, 40 लाख याहू अकाउंट्स और 15 लाख आउटलुक अकाउंट्स का डेटा खतरे में है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है, जहां फेसबुक के 1.7 करोड़, इंस्टाग्राम के 65 लाख और टिकटॉक के करीब 7.8 लाख अकाउंट्स की जानकारी लीक हुई है। मनोरंजन जगत के ऐप्स भी इससे अछूते नहीं हैं; नेटफ्लिक्स के 34 लाख अकाउंट्स के लॉगइन-पासवर्ड के साथ-साथ डिज्नी प्लस, एचबीओ मैक्स और रोब्लॉक्स (क्रशड्ढद्यश&) जैसे प्लेटफॉर्म्स का डेटा भी शामिल है। इसके अलावा 4.2 लाख वित्तीय और सरकारी अकाउंट्स की लॉगइन डिटेल्स भी इस लीक का हिस्सा हैं।
खतरनाक मैलवेयर ने की है ये बड़ी चोरी
इस भारी-भरकम डेटा लीक के पीछे ‘इन्फोस्टेलरÓ (ढ्ढठ्ठद्घशस्ह्लद्गड्डद्यद्गह्म्) नाम का एक मैलवेयर बताया जा रहा है। फाउलर ने बताया कि यह एक बेहद खतरनाक सॉफ्टवेयर है जिसे यूजर्स के डिवाइस में चुपचाप घुसपैठ करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह बैकग्राउंड में काम करते हुए यूजर्स की लॉगइन डिटेल्स और पासवर्ड चुरा लेता है। रिपोर्ट में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया कि साइबर अपराधी चोरी किए गए डेटा को क्लाउड पर स्टोर करते हैं, और सुरक्षा में चूक होने के कारण हैकर्स का चोरी किया हुआ यह डेटाबेस खुद ही लीक हो गया।
हैकर्स से ऐसे रखें अपना अकाउंट सुरक्षित
इस तरह के बड़े लीक सामने आने के बाद अपनी डिजिटल सुरक्षा को पुख्ता करना बेहद जरूरी हो गया है। जानकारों का सुझाव है कि यूजर्स को तुरंत अपने पासवर्ड बदल लेने चाहिए। हर प्लेटफॉर्म के लिए एक अलग और यूनिक पासवर्ड का इस्तेमाल करें, जो कम से कम 12 से 16 अक्षरों का हो। इसके अलावा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए ‘टू-स्टेप वेरिफिकेशनÓ (2स्ङ्क) फीचर का उपयोग जरूर करें। यह फीचर लगभग सभी बड़े प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिससे पासवर्ड डालने के बाद मोबाइल या ईमेल पर आने वाले ओटीपी के बिना कोई भी आपके अकाउंट में लॉगइन नहीं कर पाएगा।
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