कोलकाता 29 जनवरी (आरएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित 1,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में अलीपुर सहित महानगर कोलकाता में कई स्थानों पर तड़के छापेमारी की। उक्त खबर के लिखे जाने तक तलाशी ‘श्रेयÓ कंपनी के प्रमोटर सुनील कनोरिया और हेमंत कनोरिया के कार्यालयों के साथ-साथ अलीपुर क्षेत्र में उनके आवास पर भी की जा रही थी। 1,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच के सिलसिले में है। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी है। उन्होंने बताया कि कोलकाता स्थित एक वित्त कंपनी के प्रमोटरों के कार्यालयों और आवासों पर एक साथ तलाशी अभियान चल रहा है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर छापेमारी चल रही है। वहां अतिरिक्त केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2014 से 2020 के बीच एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक से ऋण लेने के नाम पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी की गई। पूर्व कोलकाता स्थित उक्त फाइनेंस कंपनी के खिलाफ बैंक प्रबंधन ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर सीबीआई ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया है कि पहले चरण में एक कंपनी ने 730.82 करोड़ रुपये का ऋण लिया, जबकि दूसरे चरण में उसकी सहयोगी कंपनी ने 260 करोड़ 20 लाख रुपये का कर्ज लिया। इसके अलावा चरणबद्ध तरीके से और भी ऋण लिए गए। बैंक का आरोप है कि ऋण लेने के बाद दोनों कंपनियों ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया और समय पर किस्तों का भुगतान नहीं किया। इसके साथ ही अतिरिक्त कर्ज भी चरणबद्ध तरीके से स्वीकृत किए गए थे। हालांकि, बैंक ने आरोप लगाया कि दोनों कंपनियां ऋण समझौते का उल्लंघन कर रही थीं और किश्तों का समय पर भुगतान करने में चूक कर रही थीं। प्रारंभिक जांच के बाद, सीबीआई ने आरोप लगाया कि दोनों कंपनियों ने कम से कम छह अन्य बैंकों से कई हजार करोड़ रुपये के कर्ज भी लिए थे, जिनमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा चुकाया नहीं गया था। 2023 में, संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने 1,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले के संबंध में सीबीआई के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।अधिकारी ने आगे बताया कि सीबीआई ने बाद में दोनों कंपनियों और उनके प्रमोटरों के खिलाफ मामला दर्ज किया। प्रारंभिक जांच में सीबीआई को यह भी जानकारी मिली है कि इन दोनों कंपनियों ने देश के छह अन्य बैंकों से भी हजारों करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जिसकी पूरी राशि अब तक बैंकों को वापस नहीं मिली है।
बताया गया है कि वर्ष 2023 में संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले में सीबीआई के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी मामले की जांच के आदेश दिए। इसके बाद सीबीआई ने फाइनेंस कंपनी, उसकी सहयोगी इकाई और उनके प्रमोटरों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसी क्रम में गुरुवार सुबह सीबीआई अधिकारियों ने अलिपुर स्थित प्रमोटरों के घरों और कार्यालयों पर छापेमारी शुरू की। अलिपुर के अलावा कोलकाता के अन्य कई इलाकों में भी तलाशी अभियान जारी है।
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