*चुनार में सरकारी मापदंडो को खुली चुनौती दे प्लाटिंग कर रहा जमीन कारोबारी
*दिन-रात ट्रैक्टर से पाटा जाता रहा मिट्टी, खामोश दिखाई दे रहा जिम्मेदार महकमा
मीरजापुर,31 जनवरी (आरएनएस)। जिले में निर्धारित सरकारी नियमों के तहत कार्य करने और कराने वाली सरकार को खुली चुनौती देते हुए जमीन कारोबारी के हौसले बुलंद बने हुए हैं। हद की बात तो यह है कि इनके आगे सरकार के वह सारे कायदे कानून भी बेअसर नजऱ आ रहे हैं, जिसमें तालाब, बीटा, पोखरा सहित जल निकासी के मार्ग को बाधित करने, कब्जा करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बताते चलें कि जिले के चुनार तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा रैपुरिया के ऐबकपुर में जलालपुर व चुनार मार्ग से सटे 464 नंबर के काश्तकार नसीम, फिरोज आदि द्वारा लगभग पांच बीघे जमीन को किसानों से औने-पौने दामों पर लेकर बिना किसी सरकारी मानक को पूर्ण किए लाख रुपया बिस्वा की दर से कृषि योग्य जमीन के स्वरूप में परिवर्तन कर सरकारी सड़क की भूमि को भी अपने रकबे में सम्मिलित कर बेचे जाने काम किया जा रहा है। इसकी शिकायत पूर्व में मुख्यमंत्री कार्यालय में करने के उपरांत जिला प्रशासन अब जाकर जागा है।
दबंगई का आलम यह है कि उपरोक्त प्लॉटर द्वारा सरकारी भूमि को भी अपने रकबे में सम्मिलित कर बेचने का कार्य कर दिया गया है। स्थानीय लोगों की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के पश्चात चुनार तहसील द्वारा कुछ दिनों पूर्व मौके का निरीक्षण कर सरकारी भूमि को प्लॉटर की भूमि से अलग दर्शाने के लिए पत्थर गड्डी का कार्य किया गया था, लेकिन सेटिंग करने में माहिर प्लाटरो द्वारा अब दिनदहाड़े अपने पूरे पांच बिघे के रकवे पर सैकड़ों ट्रैक्टर मिट्टी नगर से होते हुए चुनार थाने के सामने से दिनदहाड़े मंगवा कर पटवाने का कार्य रातों दिन महिनों तक किया गया, लेकिन प्रशासन के स्तर से इसका कोई संज्ञान क्यों नहीं लिया यह लोगों के समझ से जहां परे है वहीं इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के पुन: हस्तक्षेप के उपरांत किए जा रहे अवैध प्लाटिंग के संदर्भ में अब जिला परिषद द्वारा 3 वर्षों पश्चात अपने सर्वेर के माध्यम 29 जनवरी 2026 को ले आउट एवं रेरा में रजिस्ट्रेशन जैसे आदि नियमों का पालन किए बिना हो रहे गैर कानूनी प्लाटिंग कार्य का स्थलीय निरीक्षण कराते हुए संज्ञान लेना उचित समझा गया तो है। परंतु देखना तो अब यह है कि राजस्व को भारी क्षती पहुंचाने वाला एवं हर चुनौती को धनबल के बदौलत मैनेज करने में सक्षम प्लॉटर पूर्व की भांति शासन-प्रशासन पर फिर से भारी पड़ता है या शासन के मंशानुरूप स्थानीय एवं जिला
प्रशासन प्लाटर की मनमानी और दबंगई से प्रभावित किसानों को राहत दिलाते हुए कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करता है,ताकि आगे से कोई ऐसा कुत्सित प्रयास करने का साहस न कर पाएं।
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