भोपाल,31 जनवरी (आरएनएस)।मध्यप्रदेश पुलिस अपनी कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक और आपातकालीन चुनौतियों के अनुरूप ढालने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में भोपाल के भौंरी स्थित पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में दो बेहद महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जहां एक ओर पुलिस अधिकारियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) की बारीकियां सीखीं, वहीं दूसरी ओर हृष्ठक्रस्न के साथ मिलकर आपदा प्रबंधन की मॉक ड्रिल की।
पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। यह आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक (क्कञ्जस्) यास्मीन ज़हरा जमाल के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।
सेमिनार में विषय विशेषज्ञ दिव्यांश पांडे, सोमशेखर रेड्डी और गरिमा मेहता ने “्रह्म्ह्लद्बद्घद्बष्द्बड्डद्य ढ्ढठ्ठह्लद्गद्यद्यद्बद्दद्गठ्ठष्द्ग – स्नह्वठ्ठस्रड्डद्वद्गठ्ठह्लड्डद्य & श्वह्यह्यद्गठ्ठह्लद्बड्डद्य त्रह्वद्बस्रद्ग” विषय पर व्याख्यान दिए।
हेमंत वर्मा ने “्रश्चश्चद्यद्बष्ड्डह्लद्बशठ्ठ शद्घ ्रढ्ढ द्बठ्ठ क्कशद्यद्बष्द्बठ्ठद्द” पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे पुलिस अपराध अनुसंधान और डेटा विश्लेषण में ्रढ्ढ का उपयोग कर सकती है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डीएसपी अमरीश पटेल, निरीक्षक अनीता नागवंशी, निरीक्षक नरेंद्र बेलवंशी और आरआई रूमा नाज़ की अहम भूमिका रही।
तकनीकी दक्षता के साथ-साथ पुलिस बल को शारीरिक और मानसिक रूप से आपदाओं के लिए तैयार करने हेतु पुलिस अकादमी में ‘नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स’ (हृष्ठक्रस्न) की टीम ने प्रशिक्षणरत उप पुलिस अधीक्षकों, नव-आरक्षकों और स्टाफ को आपदा प्रबंधन के गुर सिखाए। एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने जवानों को सीपीआर (ष्टक्कक्र), एयरवे ऑब्स्ट्रक्शन क्लियर करना, रक्तस्राव रोकने और घायलों के सुरक्षित परिवहन (स्नद्बह्म्ह्यह्ल ्रद्बस्र) का व्यावहारिक अभ्यास कराया।
मॉक ड्रिल में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (ष्टक्चक्रहृ) आपदाओं से निपटने का सजीव प्रदर्शन किया गया। अकादमी परिसर में गैस रिसाव और केमिकल दुर्घटना की कृत्रिम स्थिति निर्मित कर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और नगर निगम के अग्निशमन दल ने संयुक्त कार्यवाही की। इस दौरान जवानों ने पीपीई किट, रेडिएशन रोधी सूट, मार्क-4 ऑक्सीजन सिलेंडर और फेस मास्क जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग करते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन, डीकन्टेमिनेशन और खतरनाक वेस्ट के सुरक्षित निष्पादन की प्रक्रिया को समझा।
अकादमी के उपनिदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि “किसी भी आपदा में पुलिस ही ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ होती है, इसलिए यह प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है।” इस दौरान हृष्ठक्रस्न के डीआईजी मनोज शर्मा और सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) रश्मि पांडेय भी मौजूद रहीं।

